ईविन एप द्वारा लॉकडाउन में निगरानी से बचाई गई 18 लाख की वैक्सीन

मुख्य बातें

  • कोल्डचेन स्टोर में तापमान घटने-बढ़ने की मिलती है सूचना
  • जनपद में 25 कोल्ड चेन स्टोर हैं संचालित

झाँसी : सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (ई-विन) बेहद मददगार साबित हो रहा है।

कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन में टीकाकरण न होने की वजह से टीकाकरण में प्रयुक्त होने वाली वैक्सीन को बचाने की चुनौती थी।

ई-विन एप के जरिए जनपद में इस लॉकडाउन पीरियड में लगभग 18 लाख रुपए कीमत की वैक्सीन को अनुपयोगी होने से बचा लिया गया। जनपद में 25 कोल्ड चेन स्टोर संचालित हैं।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. ए के त्रिपाठी ने बताया कि भारत सरकार की देखरेख में यूएनडीपी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से चलाए जा रहे ई-विन परियोजना से वैक्सीन की आनलाइन निगरानी की जा रही है।

कोविड-19 के समय लॉकडाउन में टीकाकरण पर रोक लगाने के कारण वैक्सीन का प्रयोग नहीं किया जा रहा था, ऐसे में ई-विन एप के जरिये की गयी निगरानी के तहत मार्च में लगभग डेढ़ लाख, अप्रैल में लगभग 16 लाख और मई में लगभग 85 हज़ार रुपए कीमत की वैक्सीन खराब होने से बचाई गई है।

इस मोबाइल एप्लिकेशन से सभी कोल्ड चेन में उपलब्ध वैक्सीन की ऑनलाइन मानीटरिंग हो रही है। ऑनलाइन निगरानी के लिए जिले में एक वैक्सीन कोल्ड चेन मैनेजर नियुक्त है। साथ ही इसके माध्यम से टीके की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा रही है।

ऐसे करती है काम

वैक्सीन कोल्ड चेन मैनेजर रुचिर शुक्ला ने बताया कि वैक्सीन कोल्ड चेन पॉइंट पर वैक्सीन के स्टॉक की मात्रा एवं भंडारण फ्रिज़ (आईएलआर) रियल टाइम तापमान की ऑनलाइन मोनिट्रिंग एविन प्रोग्राम के अंतर्गत मोबाइल एप एवं वेब पोर्टल के माध्यम से की जाती है।

जिसके लिए जनपद के प्रत्येक कोल्ड चेन पर रखे आईएलआर में टेम्परेचरलांगर नाम की एक सेंसर युक्त डिवाइस स्थापित की गयी है, यह डिवाइस इंटरनेट के माध्यम से प्रोग्राम के वेब पोर्टल से जुड़ी रहती है एवं निश्चित समयान्तराल पर उपकरण का तापमान पोर्टल पर अपडेट करती है।

टीके के सुरक्षित भंडारण के लिए नियत तापमान की जरूरत होती है। नियत तापमान में कमी या वृद्धि के कारण टीके के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन इस एप की मदद से यह कार्य आसान हो गया है।

कोल्ड चेन में नियत तापमान में कमी या वृद्धि होने पर अलार्म बजने लगता है। साथ ही इसकी सूचना एप के जरिये मुझे और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी को प्राप्त हो जाती है।

वैक्सीन सुरक्षित आईएलआर का तापमान 2 से प्लस 8 तक रहता है। टेम्परेचरलांगर से मैसेज या अलार्म के माध्यम से तापमान घटने/बढ़ने व डीप फ्रीजर बंद होने की जानकारी मिल जाती है। ऐसे में वैक्सीन को खराब होने से बचा लिया जाता है।

वैक्सीन की जानकारी रहती है अपडेट

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी का कहना है कि मोबाइल एप से मानीटरिंग में टीकों की उपलब्धता की अपडेट जानकारी मिलती रहती है।

किस सेंटर पर किस बीमारी के कितने टीके उपलब्ध हैं, वह किस हालत में हैं और उनका कोल्ड चेन मेनटेन है या नहीं, पूरा विवरण होता है।

वैक्सीन की स्टॉक में कमी होते ही उसकी तुरंत पूर्ति की जाती है। वहीं जिस वैक्सीन की अवधि पार तिथि (एक्सपायरी डेट) नजदीक आती है उसे तुरंत काम में लिया जाता है।