October 31, 2020

संकट की इस घड़ी में ग्रामीणों की ढाल बनकर खड़ी हैं आशा दीदी

मुख्य बातें

  • लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं आशा कार्यकर्ता
  • वायरस के खतरे और तपती गर्मी में भी जोश बरकरार

बाँदा : कोरोना वायरस के संक्रमण की चिंता तो है। आने-जाने में मुश्किल भी हो रही है, पर हम काम करना बंद नहीं कर सकते क्योंकि इस समय अपना फ़र्ज़ निभाना और लोगों की जान बचाना ज़रूरी है – यह कहना है नरैनी ब्लॉक के गोलेपुर कालिंजर गाँव की आशा कार्यकर्ता गीता का।

गीता जनपद की उन आशा कार्यकर्ताओं में से एक हैं जो इस वक़्त वायरस के खतरे और चढ़ते हुए पारे में भी पूरे जोश के साथ प्रवासियों की जानकारी लेने और लोगों को कोरोना के प्रति जागरुक करने में जुटी हैं।

गीता बताती हैं – वर्ष 2016 से आशा कार्यकर्ता के पद पर काम रही हूँ। आम दिनों में मैं गाँव-गाँव जाकर लोगों के हाल-चाल लिया करती थी.

गर्भवतियों की देखरेख, नवजात देखभाल, लोगों को परिवार नियोजन सम्बन्धी परामर्श देने के साथ-साथ उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकरी देती थी।

आम दिनों की अपेक्षा अब समय मुश्किल भरा है। कोरोना का संक्रमण गाँव में न फैले, इसके लिए बाहर से आए प्रवासियों की जानकारी इकट्ठा कर रही हूँ।

मेरे क्षेत्र में अब तक 70-75 प्रवासी आए हैं। लोगों को कोरोना के प्रति जागरुक कर रही हूँ। अनावश्यक बाहर न जाने, मास्क पहनने और हाथ धोने के तरीके के बारे में बता रही हूँ।

इसके अलावा सुरक्षित प्रसव और टीकाकरण का लाभ दिलाने का भी पूरा प्रयास कर रही हूँ। इतना जरूर है कि अब लोगों के घर के अन्दर नहीं जाती। कोरोना संक्रमण के चलते बाहर से ही जानकारी देकर चली आती हूँ।

गीता की तरह जनपद की तमाम आशा कार्यकर्ता आज कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार का कहना है – कोरोना महामारी के बढ़ते मरीजों के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर निगरानी को बढ़ाया जा रहा है ताकि संभावित या संक्रमित मरीजों का पता लगाकर उन्हें तुरंत क्वारंटाइन किया जाए।

आशा कार्यकर्ता इसमें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वह प्रवासियों की निगरानी के लिए गठित ग्राम एवं शहरी निगरानी समितियों की सदस्य के रूप में बाहर से आने वालों और होम क्वारंटाइन किये गए लोगों पर भी नज़र रख रही हैं। आशा कार्यकर्ताओं के बिना समुदाय में काम करना मुमकिन नहीं है।

मोर्चे पर तैनात है जनपद की 1441 आशा कार्यकर्ताओं की पैदल फ़ौज

जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुशल यादव ने बताया कि कोरोना को हराने में जागरुकता सबसे बड़ा हथियार है और आशा कार्यकर्ता इसमें विशेष रूप से सहयोग कर रही हैं।

वर्तमान में जनपद में 1441 आशा कार्यकर्ताओं की पैदल फ़ौज काम कर रही हैं। कोविड-19 को लेकर इन सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तथा ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है । व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए इन्हें मास्क और सैनीटाइज़र भी दिया गया है।