टीबी रोगी खोजने में बांदा प्रदेश में अव्वल

मुख्य बातें

  • 20 फीसदी आबादी में चले एसीएफ में मिले 256 मरीज
  • टीबी मुक्ति के लिए प्रदेश में 25 तक चलेगा अभियान

बांदा : देश को टीबी रोग से मुक्ति दिलाने के लिए 26 दिसंबर से ‘टीबी हारेगा-देश जीतेगा’ अभियान तीन चरणों में चलाया जा रहा है ।

दूसरे चरण में दो से 12 जनवरी तक एसीएफ (एक्टिव केस फाइंडिंग) अभियान चलाया गया, जिसमें प्रत्येक जनपद को 10 के स्थान पर 20 प्रतिशत आबादी पर टीबी रोगी खोजने का लक्ष्य दिया गया। प्रदेश में बांदा जनपद में सबसे ज्यादा 256 मरीज खोजे गए हैं। इनका इलाज भी शुरू कर दिया गया है ।

राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी मरीज खोज के लिए प्रदेश में 26 दिसंबर से 25 जनवरी तक अभियान चलाया जा रहा है। एसीएफ के तहत टीमों ने घर-घर जाकर लोगों से टीबी के लक्षणों को लेकर सवाल किए। उनके आधार पर बलगम की जांच कराई गई।

अभियान में 256 नए टीबी के मरीज पाए गए। जिले की चार लाख आबादी में विशेष अभियान चलाने का लक्ष्य निर्धारित था। इसमें 3,47,993 लोगों की स्क्रीनिग की गई। लक्षणों के आधार पर 1570 लोगों के बलगम व एक्सरे जांच की गई।

इसमें बलगम जांच से 153 व एक्सरे के जरिए 103 मरीज चिन्हित किए गए। इन सभी मरीजों को चिन्हित करने के साथ ही उपचार शुरू कर दिया गया है। अभियान में 80 टीमें और 16 सुपरवाइजर लगाए गए थे।

जिला क्षय रोग अधिकारी डा. एमसी पाल ने बताया कि 20 प्रतिशत आबादी के लक्ष्य में प्रदेश में सबसे ज्यादा 256 मरीज बांदा में खोजे गए। उन्होंने कहा कि पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है कि यहां इतनी संख्या में रोगियों को खोजा जा सका।

उन्होंने बताया कि टीबी की जांच और उपचार की निःशुल्क सुविधा जिले में उपलब्ध है। अपने आस-पास किसी भी व्यक्ति में टीबी में लक्षण दिखे तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार में पहले से ही कोई टीबी का मरीज है, तो उस परिवार के अन्य सदस्यों को टीबी होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसीलिए टीबी के सभी मरीजों के परिवारों की स्क्रीनिग भी की गई है।

मरीजों को मिलेगा निक्षय पोषण योजना का लाभ

टीबी कार्यक्रम के जिला समन्वयक प्रदीप वर्मा ने बताया कि टीबी का इलाज करा रहे प्रत्येक मरीज को उपचार के दौरान ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत सरकार से 500 रुपये प्रतिमाह की प्रोत्साहन राशि उनके खाते में दी जा रही है।

एसीएफ. के दौरान जो भी मरीज मिले हैं, उनका उपचार शुरू करने के साथ ही निक्षय पोर्टल पर भी दर्ज किया जा रहा है। उन्हें अपने खानपान का ध्यान रखने को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रति माह उनके खाते में पहुंचेगी।