December 4, 2020

बदलते मौसम और प्रदूषण से सांस के मरीज रहें सतर्क,खुद बचें और दूसरों को भी बचाएँ

मुख्य बातें
• गुनगुने पानी और नींबू का करें प्रयोग
• फल-सब्जियाँ खायें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएँ
• खान-पान का रखें ध्यान सेहत तभी चढ़ेगी परवान
• सांस के रोगी धूल, धुआं और प्रदूषण से बचें

वाराणसी : इन दिनों सर्दी-जुखाम के साथ फेफड़ों की समस्या के साथ सांस की तकलीफ भी बढ़ गई हैं। कोरोना की जंग जीत चुके व्यक्तियों को भी सांस की समस्याएं हो रही हैं।

कोरोना के दौर में अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित आहार, योग और व्यायाम से बढ़ाएँ। मास्क, दो गज की दूरी और बार-बार हांथ धोने की आदत को अपनाएँ।

जो मरीज सिंप्टोमैटिक यानि लक्षण सहित हैं उनसे उचित दूरी बनाकर रखें तथा भीड़-भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें। खुली छतों में न सोयें।

पूरे आस्तीन वाले कपड़े पहने, मच्छरों के आक्रमण से बचें जिससे मच्छर जनित रोगों से बचाव हो सके और आपको डेंगू और मलेरिया होने की संभावना कम रहेगी।

गुनगुने पानी और नींबू का प्रयोग करें। 24 घंटे में कम से कम 5 से 6 लीटर पानी पियें। गुनगुने पानी से ही स्नान करें। रात में 8 घंटे सोयें और चैतन्य रहें। ठंडी चीजें खाने से बचें। ठंढा पानी, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक का प्रयोग करने से बचें।

ताजे बने भोजन का उपयोग करें। हरी ताजी सब्जियों और फलों का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें। प्रतिदिन योग तथा व्यायाम करें जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और आप स्वस्थ्य रहेंगे।

कबीरचौरा स्थित मंडलीय चिकित्सालय के वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन डॉ आरके शर्मा ने बताया कि स्वांस के रोगी धूल, धुआं और प्रदूषण से बचें। फेफड़ों के मरीज अपनी दवाओं का नियमित सेवन करते रहें।

शुगर, ब्लड प्रेशर के मरीज अपना इलाज चालू रखें, दवा बंद न करें। कोई भी बीमारी हो तो स्वयं अपना इलाज न करके कबीरचौरा स्थित मंडलीय चिकित्सालय के कमरा संख्या 30 से 34 या अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र एवं कुशल चिकित्सक को दिखायें और परामर्श लें।

जो उचित उपचार बताया जाए उसका पालन लगातार करते रहें। प्रतिदिन योग एवं व्यायाम करते रहें। इस दरम्यान दवा बिल्कुल बन्द न करें।