December 18, 2019

आयरन की कमी से बच्चे हो रहे एनीमिया के शिकार,बाल स्वास्थ्य पोषण का दूसरा चरण शुरू

मुख्य बातें

  • जिले के एक लाख बच्चों को पिलएंगे विटामिन ए- अभियान आज से
  • बाल स्वास्थ्य पोषण महीने का दूसरा चरण शुरू
  • विटामिन से बच्चों में बढ़ती है प्रतिरोधक क्षमता

महोबा : नौ माह से पांच वर्ष के बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और रतौंधी सहित आंखों की अन्य बीमारियों से बचाव के लिए यूनिसेफ तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर विटामिन ‘ए’ की खुराक पिलाने के लिए 18 दिसंबर से अभियान शुरू होगा।

यह अगले माह 18 जनवरी तक चलेगा। इसमें 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ‘ए’ की खुराक पिलाई जाएगी। सीएमओ सभागार में आयोजित बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को दिशा निर्देश दिए गए।

मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुमन ने बताया कि बाल स्वास्थ्य पोषण माह साल में दो बार जून एवं दिसंबर में मनाया जाता है। यह दूसरा चरण है। जिले में एक लाख 8 हजार बच्चों को विटामिन ‘ए’ की खुराक पिलाने का लक्ष्य है। इसकी माइक्रो प्लानिंग पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर ही की गई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कार्यक्रम में किसी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। बच्चों की सूची एएनएम को उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि सत्र के दिन बच्चों को ड्यू लिस्ट के अनुसार मोबिलाइज कराएं और उनका वजन जरूर करें, जिससे बच्चों के कुपोषण की स्थित का आंकलन हो सके।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. जीआर रत्मेले ने कहा कि 9 से 12 माह के बच्चों को आधा चम्मच यानी एक एमएल घोल (1 लाख आई.यू) तथा 1 से 5 साल तक के बच्चों को पूरा चम्मच यानी दो एमएल खुराक (2 लाख आई.यू) देगी। चम्मच की स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जाएगा। बच्चों का यह खुराक एएनएम पिलाएंगी।

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जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों का वजन मापने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसकी एएनएम को रिपोर्ट दें। बैठक में एसीएमओ डा. डीसी तिवारी, अमित मिश्रा, डा. सुशील खरे, सीडीपीओ यासमीन जहां, कमलेश शर्मा सहित आईसीडीएस विभाग की सुपरवाइजर व आंगनबाड़ी शामिल रहीं।

श्वसन संबंधी संक्रमण व हड्डी रोगों से बचाव

डीआईओ डा. जीआर रत्मेले ने बताया कि विटामिन ए आखों की बीमारियों जैसे रतौंधी-अंधता से बचाव के साथ-साथ बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए भी आवश्यक है। श्वसन सम्बन्धी संक्रमण व हड्डी रोगों से बचाव में भी इसका बड़ा योगदान रहता है।

विटामिन ए देने से बच्चों में खसरा एवं डायरिया आदि बीमारियों के घातक प्रभाव में कमी लाई जा सकती है।

इससे 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में भी कमी आती है। आयोडीनयुक्त नमक के प्रयोग से बच्चों में मानसिक विकलांगता में कमी, छह माह तक स्तनपान एवं छह माह के बाद मां के दूध के साथ पूरक आहार जैसे खिचड़ी, दलिया, मीठा दूध, शिकंजी, दाल आदि को बढ़ावा देना है।