कोरोना अलर्ट: कोरोना काल में कुपोषित बच्चों का रखें ख़ास ख्याल

मुख्य बातें

  • कोविड महामारी के दौरान भी खुले हैं पोषण पुनर्वास केंद्र
  • जिलाधिकारी ने अधिक से अधिक गंभीर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करने के दिए निर्देश

बाँदा : किसी भी संक्रमण को रोकने के लिए शरीर को मज़बूत होना चाहिए। कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण कोरोना महामारी के समय उन्हें देखभाल की अत्यंत आवश्यकता है।

लॉक डाउन का असर जनपद के कुपोषित बच्चों के जीवन पर न पड़े, इसके लिए जिलाधिकारी अमित बंसल ने स्वास्थ्य विभाग व बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को प्राथमिकता पर इनकी देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा है कि ऐसे अधिक से अधिक बच्चों को तत्काल जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाए जिन्हें उचित चिकित्सीय देखरेख की ज़रूरत है।

कोरोना मरीजों की निगरानी में जुटी आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें अस्पताल पहुँचाएँ ताकि एनआरसी में उन्हें ज़रूरी देखभाल मिल सके।

साथ ही माताओं को कुपोषित बच्चों के खान-पान व साफ़-सफाई से सम्बंधित ज़रूरी सन्देश भी दिए जाएं। मुख्य विकास अधिकारी हर सप्ताह इसकी समीक्षा करेंगे।

मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा ने बताया कि गंभीर कुपोषित बच्चों का जीवन सुरक्षित रखने के लिए जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में लॉक डाउन के दौरान भी नियमित सेवाएं दी जा रही हैं।

यदि बच्चे की भूख और पोषण स्तर में कमी आए तो अभिभावक तुरंत उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या एएनएम को दिखाएं। आवश्यकता पड़ने पर 14 दिनों के लिए एनआरसी में भर्ती कराएं।

एनआरसी में मिलती हैं ये सेवाएं

एनआरसी में बच्चे के साथ-साथ उसकी माँ या एक अभिभावक के रहने का भी इंतजाम होता है। इस दौरान माँ को 100 रु प्रतिदिन दिए जाते हैं जिसमें 50 रु. सीधे उसके खाते में जबकि 50 रु. की दर से प्रतिदिन भोजन दिया जाता है। इसके अलावा चार फॉलो-अप के दौरान प्रति फॉलो-अप 100 रु. माँ के भोजन के लिए जबकि 40 रु. बच्चे के भोजन के लिए दिए जाते हैं।

हाथ धोना है ज़रूरी

यूनिसेफ के मंडलीय समन्वयक पवन मिश्रा का कहना है कि कोविड-19 के दौरान माताएं साफ़-सफाई का विशेष ध्यान रखकर कुपोषित बच्चों को संक्रमण से बचा सकती हैं।

बच्चे को खाना खिलाने से पहले, खाना पकाने या परोसने से पहले, शौच के बाद और बच्चे के मल निपटान के बाद आवश्यक रूप से साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोएं।

कुपोषण के शुरुआती चरण में यदि ध्यान दिया जाए तो घर पर ही बच्चे को ठीक किया जा सकता है। साफ़, ताज़ा घर में बना हुआ संतुलित भोजन बच्चे को दिन में 3 से 4 बार खिलाएं।

बच्चे को उसकी पसंद का खाना दें। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से प्राप्त अनुपूरक आहार से बनी रेसिपी भी बच्चे को खिलाएं।

कुपोषित बच्चे को संक्रमण से बचाने के उपाय

  • दूध की बोतल, चुसनी का प्रयोग बिलकुल न करें
  • छह माह से छोटे बच्चे को ऊपर का दूध, पानी न दें
  • साफ़ पानी, साफ़ कटोरी, साफ थाली, साफ़ हाथ का प्रयोग करें
  • यदि बच्चा लम्बे समय से चिड़चिड़ा रहा है, खाना या फिर माँ का दूध नहीं पी रहा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं