कोरोना की कहानी कोरोना चैंपियंस की ज़ुबानी

बाँदा : जनपद में पिछले कुछ दिनों में कोरोना संक्रमितों के मामलों में खासी तेज़ी आई है। सावधानी बरतने के बाद भी शहर से गाँवों तक कई लोग रोज़ इसकी चपेट में आ रहे हैं।

मंडल के चारों जिलों के कोरोना संक्रमितों का इलाज इस समय बाँदा के राजकीय मेडिकल कॉलेज में किया जा रहा है जहाँ डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी दिन-रात मरीजों के इलाज और देखभाल में जुटे हैं। उनका यही जज्बा है जिसके कारण जनपद के अधिकाँश मरीज़ कोरोना से सफल जंग जीत कर अपने घर वापस लौट पाए हैं।

हांलाकि इस जंग में हमारे कई डॉक्टर योद्धाओं और स्वास्थ्य कर्मियों को भी कोविड-19 शिकार होना पड़ा है। ऐसे में हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम कोरोना से जंग जीत चुके और उसमें जुटे सभी योद्धाओं का सम्मान करें और उनका मनोबल बढाएं।

उनके या उनके परिवार वालों के साथ किसी तरह का भेदभाव न करें। कोरोना संक्रमितों, संभावित संक्रमण वाले व्यक्ति व स्वास्स्थ्य कर्मियों के प्रति भेदभाव न हो, इसके लिए सरकार भी लोगों को जागरुक कर रही है।

कोरोना से जंग जीत चुके डॉक्टर बता रहे हैं कि इस मुश्किल वक़्त में हमें किन चीज़ों का ध्यान देना चाहिए।

वायरस नहीं करता किसी के प्रति भेदभाव, आप भी न करें- डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर, साइकैट्री विभाग, बाँदा मेडिकल कॉलेज

बाँदा मेडिकल कॉलेज के डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा इन्फेक्शन प्रिवेंशन एंड कण्ट्रोल पर स्वास्स्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने के दौरान 2 जुलाई को कोरोना से संक्रमित हुए जिसके बाद वे पहले अस्पताल में और फिर घर पर आइसोलेशन में रहे और सब सावधानियां बरतीं।

इसके बाद 13 जुलाई को उनकी तीसरी रिपोर्ट नेगेटिव आई। डॉ. मिश्रा बताते हैं – कोविड-19 के लक्षण आम सर्दी ज़ुकाम से काफी जटिल हो सकते हैं। इसलिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत रखकर और सब सावधानियां बरतकर ही इसे हराया जा सकता है।

आइसोलेशन में रहने के दौरान सकारात्मक रवैया रखें। समय बिताने के लिए अपनी पसंद के मुताबिक किताब पढना, संगीत सुनना आदि कर सकते हैं जिससे मानसिक तनाव न हो।

ऐसे में एक ज़रूरी ध्यान देने योग्य बात यह है कि कोरोना वायरस किसी के प्रति भेदभाव नहीं करता। यह आज किसी और को हुआ है तो कल आपको भी हो सकता है।

इसलिए कोरोना संक्रमितों का तिरस्कार कर उनसे दूरी न बनाएं। बल्कि उनका सम्मान और सहयोग करें। इससे मरीजों को बीमारी से लड़ने की ताकत मिलेगी।

कोविड-19 को मात दे चुके लोगों से नहीं है संक्रमण का खतरा – डॉ. अभिषेक राज, फिजिशियन, बाँदा मेडिकल कॉलेज

मेडिकल कॉलेज के कोविड आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी के दौरान 2 जुलाई को डॉ. अभिषेक राज में कोविड-19 की पुष्टि हुई। कुछ समय आइसोलेशन में रहने के बाद वह अपने घर आगरा चले गए और वहां भी खुद को आइसोलेशन में रखा।

वहां टेस्ट कराने पर 18 जुलाई को उनकी तीसरी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। डॉ. अभिषेक का कहना है कि मैं एक डॉक्टर हूँ। मेरे पिता और पत्नी भी डॉक्टर हैं इसलिए संक्रमित होने पर मुझे घबराहट नहीं हुई। पर आमतौर पर लोगों की प्रतिक्रिया ऐसी नहीं होती।

संक्रमित के अलावा आस-पास के लोग भी वायरस से डर जाते हैं और मरीज़ से दूरी बना लेते हैं। जबकि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों का टेस्ट करवाकर उन्हें भी क्वारंटाइन में रखा जाता है।

कोरोना संक्रमण को मात दे चुके मरीजों से किसी तरह का संक्रमण नहीं फैलता। इसलिए उनसे किसी तरह का भेदभाव नहीं करना चाहिए। इस मुश्किल समय में हमें संक्रमित व्यक्ति का मनोबल बढ़ाना चाहिए।

अफवाहों पर ध्यान न देकर विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी को मानना चाहिए। पौष्टिक भोजन खाने, साफ़-सफाई रखने, शारीरिक दूरी बनाकर रखने, मास्क पहनने और बार-बार हाथ धोने की आदतों को अपनाकर हम वायरस को मात दे सकते हैं।