April 23, 2021

बिना टेस्ट अब नहीं बन सकेंगे डीएल,राजधानी सहित प्रदेश के हर जिले में स्थाई डीएल बनाने का कोटा घटा

उत्तर प्रदेश : परिवहन विभाग ने राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के हर जिले में आरटीओ में बिना वाहन टेस्ट के ही परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर देने वाले सिंडीकेट पर शिकंजा कस दिया है।

इसके लिए आरटीओ में रोजाना बनने वाले परमानेंट डीएल का कोटा तत्काल प्रभाव से घटा दिया है। इससे ऑनलाइन स्थाई डीएल आवेदकों को अब कम टाइम स्लॉट मिलेगा। 

महानगर को छोड़कर छोटे शहरों के संभागीय निरीक्षक एक दिन में सिर्फ 36 आवेदकों के परमानेंट डीएल को मंजूरी दे पाएंगे। अब सिर्फ वही आवेदक परमानेंट डीएल के हकदार होंगे, जो संभागीय निरीक्षक के नेतृत्व में होने वाले वाहन टेस्ट में पास होंगे।

परिवहन आयुक्त धीरज साहू ने वाहन चालकों के टेस्ट को सुनिश्चित कराने के लिए स्थाई डीएल का कोटा घटाने का आदेश जारी कर दिया है।

इससे लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ कार्यालय में 276 स्थाई डीएल की जगह अब प्रतिदिन 180 लाइसेंस ही बन पाएंगे। जबकि देवा रोड एआरटीओ कार्यालय में 120 स्थाई डील की जगह अब मात्र 36 लाइसेंस ही बन सकेंगे। 

दरअसल, परिवहन विभाग को लगातार बिना ड्राइविंग टेस्ट लिए लाइसेंस जारी करने की शिकायत मिल रही थीं। इस संबंध में एक आरटीआई भी दाखिल की गई थी। इसे देखते हुए संभागीय निरीक्षकों के पदों के सापेक्ष जिलों में स्थाई डीएल बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

लखनऊ में 351 की जगह बनेंगे 216 डीएल

आपको बता दें कि नए आदेश के मुताबिक अब राजधानी में रोजाना 351 की जगह 216 आवेदकों के ही परमानेंट डीएल बन सकेंगे।

कानपुर रोड स्थित आरटीओ में रोजाना 276 और देवा रोड स्थित एआरटीओ में 75 आवेदकों के परमानेंट डीएल बनते थे। अब आरटीओ में 180 और एआरटीओ में 36 के परमानेंट डीएल बन पाएंगे।

इन जिलों में बनेंगे इतने डीएल

  • सीतापुर    72
  • रायबरेली   36
  • उन्नाव      36
  • हरदोई      36

बिना टेस्ट डीएल के लिए देनी पड़ती थी 1100 की घूस

दलाल मंडी के एक दलाल ने बताया कि जो बिना वाहन टेस्ट दिए परमानेंट डीएल बनवाना चाहते थे, उन्हें ऊपर के खर्च के 1500 रुपये देने पड़ते थे। इसमें 1100 रुपये की घूस देने पर बिना वाहन टेस्ट आसानी से डीएल बन जाता था और 400 रुपये की कमाई हो जाती थी।

अब बिना टेस्ट के डीएल बनेगा ही नहीं तो कमाई नहीं हो पाएगी। इस खेल से आरटीओ सिंडीकेट की रोजाना औसतन एक लाख रुपये से अधिक की कमाई हो रही थी।