April 23, 2021

एटा: खाने का बिल मांगने पर ढाबा मालिक समेत 11 लोगों को फर्जी मुठभेड़ में भेजा जेल,3 पुलिसकर्मी सस्पेंड

एटा : उत्तर प्रदेश के एटा में पुलिस ने एक ऐसा कारनामा किया है जिसकी वजह से कई सवाल खड़े हो गई हैं. दरअसल, एक दिव्यांग युवक जो ढाबा चलाता है, उसकी दुकान पर एक दिन कुछ पुलिसवाललों ने खाना खाया लेकिन जब पैसा देने का नंबर आया तो पुलिस वाले उसके साथ मारपीट करने लगे।

यही नहीं फर्जी मुठभेड़ उस ढाबे वाले को और उसके करीब दर्जन भर लोगों को ढाबे से उठाकर ले गए और संगीन धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें जेल में डाल दिया.

लेकिन ढाबे वाला युवक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट निकला. उसने इस फर्जी मुठभेड़ के खिलाफ मुहिम छेड़ दी. जेल से बाहर आने के बाद आलाधिकारियों के पास फ़रियाद लगाई. न्याय के लिए जंग लड़ी और अंत में जीत हासिल की.

मामले में एक दरोगा समेत 2 सिपाही सस्पेंड कर दिए गए, उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया. गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है. 

ढाबे वाला पीड़ित दिव्यांग प्रवीण कुमार कभी टाटा केमिकल में एक इंजीनियर हुआ करता था. 3 साल पहले एक सड़क हादसे में उसने अपना पैर गंवा दिया. दूसरा पैर भी ठीक से काम नहीं करता है.

इलाज में काफी रुपये खर्च होने के बाद घर की स्थिति काफी खराब हो गई, जिसके चलते दिव्यांग प्रवीण ने अपने रिश्तेदार से जमीन किराए पर लेकर एक छोटा सा ढाबा शुरू किया. जिसे वह मां और भाई के साथ मिलकर चलाता था.

जानें ये है पूरा मामला

दरअसल, ये पूरा मामला एटा के कोतवाली देहात थाना का है. जहां प्रवीण कुमार नाम के एक दिव्यांग युवक ने डीएम विभा चहल को पुलिस के खिलाफ एक शिकायती पत्र दिया.

प्रवीण ने कहा कि उसका ढाबा एटा से 5 किलोमीटर दूर आगरा रोड पर खुशाल गढ़ गांव के पास है. जिसे वह अपने भाई और मां के साथ मिलकर चलाता है.

प्रवीण ने आरोप लगाया कि काम शुरू हुए अभी चार-पांच महीना ही बीते थे कि तभी ढाबे पर पुलिस की नजर लग गई. 4 मार्च को सिपाहियों द्वारा खाना खाकर रुपये मांगना उसको भारी पड़ गया. 

पहले तो सिपाहियों ने ढाबे वाले से गाली-गलौज की, फिर इतने से भी मन भरा रहा तो उसकी जमकर पिटाई की. फिर अगले दिन दरोगा के साथ भारी फोर्स के साथ होटल पर दबिश दे दी.

इस दौरान ढाबे पर काम करने वालों के अलावा ग्राहकों समेत करीब 11 लोगों को पुलिस थाने उठा ले गई. जिसमें से एक व्यक्ति को एक लाख रुपये लेकर छोड़ दिया.

बाकी लोगों पर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर शराब एवं अन्य मादक पदार्थ की तस्करी का आरोप लगाते हुए जेल में डाल दिया. पुलिसवालों ने 6 तमंचे और गांजा की बरामदगी भी दिखाई. 

पीड़ित ने कहा कि पुलिसवाले 400-500 रुपये का खाना खाते और पेमेंट में सिर्फ 100 रुपये देते. मारपीट के बाद घटना वाले दिन एक पुलिसवाले ने कहा कि मैं 9 साल से थाने में हूं, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया. साथ ही ढाबे पर 6 राउंड करने का आरोप भी मढ़ दिया. 

हालांकि, जब पीड़ित ने मामले की शिकायत डीएम विभा चहल से की, तो उन्होंने जांच एसएसपी को सौंप दी. जांच के बाद पुलिस की पूरी कहानी झूठी निकली.

जिसके बाद आरोपी दरोगा इंद्रेश पाल सिंह को सस्‍पेंड कर द‍िया गया. सिपाहियों के खिलाफ केस दर्ज करते हुए दोनों को सस्‍पेंड कर दिया गया, दोनों अभी फरार हैं. ये तीनों थाने से शराब के गायब होने के मामले में भी आरोपित थे. 

वहीं ढाबे में फर्जी मुठभेड़ के मामले में सिपाही शैलेंद्र और सिपाही संतोष का नाम सामने आया है, उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है. उनके खिलाफ जांच जारी है. 

इस पूरे मामले पर जांच कर रहे एडिशन एसपी क्राइम राहुल कुमार ने बताया के डीएम के द्वारा एक प्रार्थना पत्र जांच के लिए मेरे पास आया है. जिसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही है.

पुलिसकर्मियों द्वारा गलत तरीके से लोगों को फंसाने का मामला संज्ञान में है. दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.