किसान आंदोलन में छाया सन्नाटा सड़कों से नदारद दिख रहे किसान

नई दिल्ली : कृषि कानून के खिलााफ पिछले 80 दिनों से दिल्‍ली के अलग-अलग बॉर्डर्स पर चल रहे आंदोलन के बीच गाजीपुर बॉर्डर पर अलग ही नजारा देखने को मिला. आज सुबह से ही गाजपुर बॉर्डर पर किसानों की संख्‍या न के बराबर दिखाई दे रही है.

यहां किसान नदारद है और मंच खाली पड़े हैं । मंच के साथ ही सड़क पर भी किसानों की संख्‍या न के बराबर दिखाई दे रही है. किसान आंदोलन के नाम पर अब केवल सड़क बंद है. टेंट और लंगर सेवा के पास भी इक्का दुक्का लोग ही दिखाई पड़ रहे हैं.

बता दें कि किसान नेता राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर से ही लोगों से किसान आंदोलन में ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में शामिल होने की बात कही थी.

पिछले कई दिनों से इस बात को लेकर चर्चा जोरों पर थी कि किसान आंदोलन के अंदर अब फूट पड़ चुकी है. किसान संगठन से जुड़े नेता भले ही किसान आंदोलन के आगे की रणनीति बनाने की बात कर रहे हैं लेकिन अंदर हकीकत कुछ और ही है.

आज सुबह गाजीपुर बॉर्डर का नजारा देखने के बाद इस आंदोलन के कमजोर होने की बात साफ होती दिखाई दे रही है. आंदोलन में शामिल होने पहुंचे किसानों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए तैयार किया गया किसान मंच पूरी तरह से खाली पड़ा है.

किसान 18 फरवरी को चलाएंगे रेल रोको अभियान

गौरतलब है कि संयुक्त मोर्चा ने अब किसान ट्रैक्टर रैली और देशभर में चक्का जाम करने के बाद अब 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक रेल रोको अभियान चलाने का फैसला किया है.

इस फैसले के बाद अब सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है.