राष्ट्रीय बालिका दिवस पर हुयी लिंग संवेदीकरण कार्यशाला

मुख्य बातें

  • कन्या स्थिति में सुधार के लिए जागरूकता के साथ आत्ममंथन भी करे- मंडलायुक्त

झाँसी : महिला स्थिति में सुधार के बिना विश्व का कल्याण असंभव है। लिंग आधारित भेद को समाप्त करना मात्र एक लक्ष्य नहीं है बल्कि समाज के आर्थिक विकास, सुशासन व सतत विकास को बढ़ावा देने की पहली शर्त है।

यह बात मंडलायुक्त सुभाष चन्द्र शर्मा ने राष्ट्रीय बालिका दिवस से एक दिन पूर्व स्वास्थ्य विभाग के द्वारा आयोजित लिंग संवेदीकरण कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों से कही।

उन्होने उपस्थित सभी लोगों से कहा कि वह स्वयं में आत्मचिंतन करे कि पिछले एक वर्ष में कन्या सुरक्षा, समान अधिकार, लिंग जांच, बाल विवाह और दहेज़ नहीं लेना जैसी बातों पर आपने अपने स्तर पर क्या जागरूकता की।

उन्होने कहा कि हम सबको पता है कि एक महिला या कन्या के क्या अधिकार है, कन्या भ्रूण की जांच व हत्या अपराध है, बेटियाँ हमारी आज भी सुरक्षित नहीं है। लेकिन इन सबके लिए व्यक्तिगत तौर पर क्या ठोस कदम उठाए गए इसके लिए आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।

यह विचार करने की जरूरत है कि बेटी को सक्षम बनाने के लिए क्या किया जा सकता है। इस पर सभी विभाग जैसे शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, आईसीडीएस, स्वास्थ्य को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

डिप्टी डायरेक्टर सेकेण्डरी एजुकेशन मंशा राम जी ने कहा कि पुरातन समय से ही महिलाओं की स्थिति एक दयनीय अवस्था में रही, जिस तरह से महाभारत में भी एक स्त्री को जुए में दांव पर लगा दिया गया था।

धीरे धीरे प्रयास करके भी आज हम महिलाओं की स्थिति को ऐसी अवस्था में नहीं लेके आ पाये है, जहां हम यह कह सके कि हमारा प्रयास सफल रहा।

संयुक्त निदेशक डॉ॰ रेखा रानी ने कहा कि बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ स्लोगन के साथ बेटों को भी पढ़ाओ स्लोगन चलना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे है सिफ़प्सा के मण्डलीय परियोजना प्रबन्धक आनंद चौबे ने पीपीटी के माध्यम से कन्याओं की स्थिति के बारें में विस्तार से चर्चा की, उन्होने बताया कि वर्ष 1951 में लिंग अनुपात की दर 946 थी वही वर्ष 2011 में 943 रह गयी।

बीच में थोड़े बहुत उतार चढ़ाव आए किन्तु पिछले 7 दशक में इस स्थिति में कोई उल्लेखित सुधार देखने को नहीं मिला। इसी के साथ मण्डल की बात करे तो मण्डल के तीनों जनपदों में वर्ष 2001 और वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लिंग अनुपात में गिरावट दर्ज की गयी है।

इसके साथ ही उन्होने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे 2015-17 के अनुसार मण्डल के ललितपुर में लगभग 49 प्रतिशत कन्याओं का विवाह 18 वर्ष की आयु के पहले हो गया था, वही झाँसी और जालौन में इसका प्रतिशत 22 था। इस स्थिति का असर महिला स्वास्थ्य पर भी बहुत गहन रूप से पड़ता है।

मंडलायुक्त ने बैठक में उपस्थित सभी महिलाओं को आगे बढ़कर अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित किया और उपस्थित लोगों से महिला स्थिति में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए इस संबंध में विस्तार से वार्ता की।

इस संदर्भ में आयुर्वेद यूनानी विभाग की डॉ॰ अरुणा, सीएफ़एआर से सोनम राठौर और ललितपुर की डीपीएम रज़िया ने अपने विचार रखे।

अंत में नव नियुक्त अपर निदेशक डॉ॰ अल्पना बरतारिया ने मंडलायुक्त और उपस्थित सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

कार्यक्रम में उप निदेशक समाज कल्याण एस एन त्रिपाठी, अपर निदेशक बेसिक शिक्षा जी एस राजपूत, निदेशक महिला कल्याण एस के गुप्ता सहित सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक मौजूद रहे।