गोरखपुर: दरोगा ने अपने सिपाहियों के साथ मिलकर की 34 लाख की लूट

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश की गोरखपुर पुलिस ने वर्दी को शर्मशार करतेे हुए लूट की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दियाा है. दरअसल, गोरखपुर के कैंट इलाके के रेलवे स्टेशन से महराजगंज के दो स्वर्ण व्यापारियों को अगवा कर नौसड़ के पास से 34 लाख रुपये बस्ती में तैनात दरोगा व सिपाहियोें ने मिलकर लूटे थे।

गोरखपुर पुलिस ने 24 घंटे के अंदर लूट कांड का पर्दाफाश करके दरोगा धर्मेंद्र यादव व दो सिपाहियों सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपियों के पास से लूट के 19 लाख रुपये नकद और 11 लाख रुपये कीमत का सोना व चांदी बरामद कर लिया गया। गिरोह का सरगना दरोगा धर्मेंद्र यादव को बताया गया है। इसके साथ ही आरोपी दरोगा ने लूट की एक और घटना कबूल की है।

पुलिस के मुताबिक दरोगा ने चार लोगों के साथ कस्टम अफसर बनकर शाहपुर में एक व्यापारी से चार किलोग्राम चांदी लूटी थी। इस मामले में भी एक पुलिस कर्मी आरोपी है। वह अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है।

दूसरी तरफ बस्ती के आईजी राजेश राय ने बताया कि स्वर्ण व्यापारियों से लूट के आरोपी पुरानी बस्ती थाने में तैनात दरोगा सहित 12 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

लापरवाही बरतने पर इंस्पेक्टर अवधेश राज सिंह सहित नौ और पुलिस कर्मी निलंबित किया गया है। निलंबित पुलिस कर्मियों की कुल संख्या 12 है। मामले की जांच एसपी को सौंपी गई है। 

ये हैं आरोपी दरोगा और सिपाही

आरोपियों की पहचान सिकरीगंज के जगरनाथपुर निवासी दरोगा धर्मेंद्र यादव, मऊ के सराय लखनसी इलाके के रैकवार डीह गांव के मूल निवासी सिपाही महेंद्र यादव, गाजीपुर के जंगीपुर थाना क्षेत्र के अलवरपुर निवासी सिपाही संतोष यादव, बोलेरो चालक पुरानी बस्ती करही निवासी देवेंद्र यादव, फर्जी पत्रकार व मुखबिर ठुठीवारी, महराजगंज निवासी शैलेश यादव और निचलौली महराजगंज निवासी दुर्गेश अग्रहरि के रूप में हुई है।

क्या है पूरा मामला ?

डीआईजी/एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइंस में  पत्रकार वार्ता करके घटना का पर्दाफाश किया। एसएसपी ने बताया कि कैंट के रेलवे स्टेशन की जनरथ बस से गत बुधवार को उतारकर महराजगंज, निचलौल निवासी व्यापारी दीपक वर्मा और रामू यादव को पुलिस की वर्दी में ले जाकर नौसड़ के पास 19 लाख नकद और 11 लाख रुपये का सोना लूटा गया था। घटना की जानकारी होने के बाद पुलिस की टीमें लगी थीं।

सीसीटीवी फुटेज की मदद से बोलेरो का नंबर मिल गया और फिर पता चला कि बोलेरो बस्ती की है। बस्ती में चालक को पकड़ा गया तो मालूम चला कि दरोगा और सिपाही बोलेरो को लेकर गोरखपुर आए थे।

इसके बाद ही घटना का पर्दाफाश हो गया। पूरे मामले को अंजाम देने वाले दरोगा व सिपाहियों सहित छह आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में दरोगा ने शाहपुर इलाके में कस्टम अफसर बनकर लूट करने की वारदात भी कबूल कर ली है। एसएसपी ने बताया कि दरोगा धर्मेंद्र यादव ने पूछताछ में शाहपुर लूट कांड में शामिल होना स्वीकार किया है। इस घटना को दरोगा के साथ ही शैलेश यादव और दुर्गेश भी शामिल थे। एक सिपाही का नाम भी आया है।

आरोपी दरोगा और सिपाही पर लगेगा रासुका, गैंगस्टर

पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ रासुका व गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की बात कही है। एसएसपी जोगेंद्र कुमार का कहना है कि जांच के बाद आरोपियों की संपत्ति भी जब्त की जाएगी।

बस्ती पुलिस से आरोपी पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी की सिफारिश कर दी गई है। इसपर अंतिम फैसला बस्ती पुलिस को लेना है।  

इस तरह खुला 34 लाख रुपये लूट का राज

शुरुआती जांच में पुलिस ने घटना को गलत ठहरा दिया था लेकिन जब एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने जांच- पड़ताल शुरू की तो कैंट इंस्पेक्टर अनिल उपाध्याय के हाथ एक सीसीटीवी फुटेज लग गया।

इसमें वर्दी के साथ पिस्टल भी मौजूद थी। सर्विस गन को पुलिस ने पहचान लिया और यहीं से जांच असल पुलिस वालों की ओर मुड़ गई। इसके बाद बोलेरो का नंबर मिल गया।

बोलेरो चालक को गोरखपुर से गई टीम ने जैसे ही पकड़, उसने तोते की तरह पुलिस कर्मियों का नाम बोलना शुरू कर दिया। बता दिया कि दरोगा और सिपाही बोलेरो के साथ गोरखपुर आए थे।

बोेलेरो चालक ने घटना के बारे में भी बता दिया। इसके बाद  ही पुलिस ने आरोपित दरोगा और सिपाही को पकड़ लिया। दरोगा ने शुरू में आनाकानी की लेकिन जब घर की तलाशी शुरू की गई तो उसने बताया कि एक गेस्ट के कमरे में रुपये छिपाकर रखा है।

पर्दाफाश करने वाले पुलिस कर्मियों को 25 हजार का इनाम

घटना का पर्दाफाश करने वाले पुलिस कर्मियों को एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम दिया है। इसका पत्र भी डीजीपी को भेज दिया गया है। एसएसपी ने कहा कि पुलिस के रसूख को चुनौती देने वालों को कड़ी सजा मिलेगी।