August 13, 2022

हैकर्स ने हैक कर ली यूपी विधानसभा की वेबसाइट, डाले आपत्तिजनक पोस्ट, जांच में जुटी साइबर सेल

यूपी : एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को डिजिटलाइज्ड करने का अभियान छेड़ रखा है। और कोरोना महामारी के बाद तो डिजिटलाइजेशन तेजी से बढ़ा है।

तो वहीं, उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव 2022 से पहले हैकर्स ने एक बड़ी घटना को अंजाम दिया है.

उत्तर प्रदेश के विधानसभा की वेबसाइट साइबर हैकरों ने हैक कर ली है। इस घटना से शासन व प्रशासन में हड़कम्प मच गया है।

हैकरों ने वेबसाइट हैक कर आपत्तिजनक पोस्ट डाली है जिसके बाद ही वेबसाइट संचालन करने वाले लोगों को संदेह हुआ।

वेबसाइट हैक होने की जानकारी होते ही यूपी डेस्को ने इसकी शिकायत साइबर क्राइम थाने मे दर्ज कराया है। वेबसाइट हैक होने के मामले की जांच साइबर सेल ने शुरू कर दी है।

www.upvidhansabhaproceedings.gov.in वेबसाइट को हैक किया गया हैं।

साइबर क्राइम थाना के प्रभारी के मुताबिक लखनऊ ग्रामीण में सूचना प्रोद्यौगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008, 66 सी के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।

यूपी डेस्को के सहायक प्रबंधक रामशंकर सिंह के मुताबिक पुलिस को तहरीर दी गई है। मुकदमा दर्ज हो गया है।

वहीं इस मामले की जानकारी होने पर एडीजी साइबर क्राइम राम कुमार ने खुद गंभीरता से कार्रवाई शुरू करवा दी है। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने दावा किया है कि जल्द ही हैकर को दबोच लेंगे।

अलग अलग सरकारी विभागों के कई वेबसाइट हुए हैक

एक सप्ताह में सरकारी बेवसाइट हैक होने के कई मामले सामने आये हैं। पांच सितंबर को आरपीएफ ने रेलवे की सरकारी बेवसाइट हैक करके टिकट की जालसाजी करने वाले को गिरफ्तार किया था।

आरपीएफ को जानकारी मिली थी कि पट्टी में ढखवा रोड पर एक साइबर कैफे में रेलवे की वेबसाइट हैक कर अवैध तरीके से टिकट बनाए जा रहे हैं।

बीते रविवार को इस पर आरपीएफ ने पट्टी कोतवाली क्षेत्र के ढकवा रोड पर स्थित साइबर कैफे पर छापा मारकर आरोपी अनुपम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

लखनऊ में बुधवार को विभूतिखंड पुलिस ने अंगूठे का बॉयोमेट्रिक क्लोन तैयार कर ठगी करने वाले 3 ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी सरकारी वेबसाइट (आईजीआरएस) से रजिस्ट्री का डेटा चुराते थे।

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों के अंगूठे के बॉयोमेट्रिक प्रिंट ले लेते थे। इसके बाद फिंगर प्रिंट का क्लोन बनाकर उनके खातों से पैसा अपने डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर लेते थे।

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