स्वास्थ्य विभाग “आशा” से जीत रहे हैं कोरोना के खिलाफ जंग

आशा” हैं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की पहली सिपाही

ललितपुर : कोरोना संक्रमण के इस दौर में डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका अतुलनीय है| उन्ही के बदौलत हम आज इस जंग में कोरोना से डट कर मुकाबला कर पा रहे हैं| लेकिन स्वास्थ्य विभाग बिना आशा कार्यकर्ता के अधूरा है|

डीसीपीएम गणेश ने बताया आशा प्रथम पंक्ति की स्वास्थ्य कार्यकर्ती है जिससे मरीज डॉक्टर तक पहुँचता है खास कर ग्रामीण इलाकों में| उन्होंने बताया कि जनपद में कुल 947 आशा बहू ग्रामीण क्षेत्र में 13 शहरी क्षेत्र और 37 आशा संगिनी कार्यरत है|

इस वक्त सभी आशा प्रवासी मजदूरों की लिस्ट बना रही है और साथ ही शेल्टर होम में क्वारंटाइन लोगों की सुविधा भी देखती हैं| और जिन लोगों को घर में क्वारंटाइन किया है उनके घर के बाहर निशान लगा रहीं हैं|

वह बताते हैं आशा से ही ग्रामीण स्तर से जानकारी एकत्र करने में बहुत सुविधा होती है, एक तरह से वह ग्रामीण स्वास्थ सेवा की पहली सिपाही है|

जाखलौन गाँव के बिरधा ब्लॉक की आशा कार्यकर्ती सुधा देवी बताती है सुबह 8 बजते ही गाँव के भ्रमण पर निकल जाती है और बाहर से आये लोगो की सूची बनाती है, और शाम को भी गाँव का एक चक्कर लगाती है ताकि कोई भी बाहर से आया हुआ छूटने नहीं पाए|

बाहर से आये लोगों को चिन्हित कर स्वास्थ्य केंद्र जाँच को भेजती है| आजकल लोगो में कोरोना को लेकर डर सा है, उनसे लोग अक्सर पूछते हैं कि यह कैसे रुक सकता है?

यह वायरस कब खत्म होगा ? वह बताती है इसका जवाब तो उनके पास नहीं है लेकिन सभी लोगो को उचित दूरी और हाथ धोने की सलाह देती हैं|

साथ ही दोबारा शुरू हुई वीएचएनडी और एचबीएनसी सेवाओं के दौरान भी दिए हुये निर्देशों का पालन करते हुए कार्य कर रही हैं|

वह बताती हैं अभी हाल में ग्राम प्रधान ने उन्हें कोरोना संक्रमण के दौरान काम करने को लेकर सम्मानित भी किया है| उनके परिवार में पति और एक लड़का है, एहतियात के लिए वह अभी उनसे उचित दूरी बनाये हुए हैं|

यह पूछने पर की उनका इस क्षेत्र में कब और कैसे आना हुआ ? तो वह बताती है साल 2006 में ग्राम प्रधान ने उनके परिवार से बात करके काम करने का सुझाव दिया क्योंकि वह हाई स्कूल पास थी और ससुराल का भी सहयोग मिला इस तरह वह “आशा” बन पाई|

वह बताती है शुरुआत में गाँव के लोग अक्सर ताना मारते थे, किसी भी तरह का सहयोग नही करते थे और गाँव में भ्रमण के दौरान भी छीटाकशी करते थे| वह बताती है धीरे धीरे लोगों की सोच बदली और अब उन्हें पूरा सहयोग मिल रहा है|

तालबेहट ब्लॉक के ककरारी गाँव की आशा निर्मला देवी बताती है अभी वह बाहर से आये हुए लोगों की सूची बना रही है और जिन लोगो को घर में रहने को बोला गया है उनके घर के बाहर स्टीकर चिपका रही हैं|

वह बताती है कोरोना संक्रमण के दौरान उनका काम और चुनौतीपूर्ण हो गया है,गर्मी और धूप को नजरंदाज करके दिन में उन्हें जैसे ही बाहर से आये व्यक्तियों की सूचना मिलती है, उन्हें तुरंत जाना पड़ता है|

घर में क्वारंटाइन किये लोगों को भी समय समय पर देखती है की कहीं कोई गाँव में तो नहीं घूम रहा है| साथ ही शेल्टर होम में क्वारंटाइन किये लोगो को भी देखना होता है की उन्हें क्या खाना दिया जा रहा है ,उन्हें किसी प्रकार की कोई समस्या तो नहीं है|