April 23, 2021

होली विशेष: राधा जी श्याम रंग में डूबी थी अपनी सुध-बुध खोकर बस यही रंग वास्तविक रंग है

होली का महापर्व हिन्दू धर्म में धूम धाम से मनाया जाता है । यह प्रतीक है भक्ति का और रंगोत्सव का । पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप स्वयं को ईश्वर मानता था और अपनी संपूर्ण प्रजा को ईश्वर की पूजा न करके स्वयं की पूजा करने का आदेश दे रखा था । उसका आदेश था कि वही उनका भगवान है ।

किंतु उसका पुत्र प्रहलाद ईश्वर का अनन्य भक्त था। वह हर समय श्री हरि का नाम जपता रहता था। पिता के मना करने पर भी वह भगवान में आस्था रखता था ‌। अपने बेटे को भगवान की भक्ति में लीन देखकर हिरण्यकश्यप क्रोध से लाल हो जाता था।

उसने कई बार बेटे को प्रभु की भक्ति से हटाने के प्रयास किया, लेकिन प्रह्लाद तो हर पल श्री हरि में ही लीन रहता था। अत: उसे मरवाने के लिए राजा ने अपनी बहन होलिका को अपने पुत्र को गोद में लेकर जलती लकड़ियों पर बैठ प्रहलाद को भस्म करने के लिए कहा ।

दरअसल हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को एक वरदान प्राप्त था जिसकी वजह से अग्नि उसे छू भी नहीं सकती थी। इसलिए होलिका अग्नि में प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठ गई, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति की विजय हुई और उस अग्नि में होलिका ही जलकर भस्म हो गई और हरि भक्त प्रह्लाद का बाल भी बांका न हुआ।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक इस कहानी को होली के समय याद किया जाता है । इसके साथ ही खुशी और उत्सव के प्रतीक विविध रंगों को भी इस महापर्व में शामिल कर लिया गया ।

प्रकृति के इस अलौकिक वसंतोत्सव में होली का विशेष महत्व है, क्योंकि यह लोकप्रिय त्योहार जीवन के जागरण का पर्व है। जो मन की चेतनाओं को शक्ति देने का प्रतीक भी है ‌‌। लोग हर्ष और उल्लास के विभिन्न प्रकार के रंगों से होली खेलते हैं ।

बृज की होली तो विश्व प्रसिद्ध है गोपियां और ग्वाल सहित पूरा बृज होली के त्योहार में रंगों में सराबोर होकर कृष्णमय हो जाता है । हिंदू मान्यता के अनुसार कृष्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण संपूर्ण चराचर के स्वामी हैं ।

राधा कृष्ण का प्रेम आज भी निधिवन में दिखता है। कहते हैं यहां आज भी हर रात राधा कृष्ण आते हैं। मान्यताओं के अनुसार यह वही वन है जहां भगवान श्री कृष्ण ने रासलीला रचाई थी । उद्धव कहते हैं कि राधा जी का कृष्ण के लिए प्रेम, प्रेम की पराकाष्ठा है ।

राधा की तरह कृष्ण में समर्पित होकर अपने अस्तित्व को भूल जाना, स्वयं को शून्य कर देना निर्वात की तरह यही तो प्रेम का रंग-रूप है जैसे राधा जी श्याम रंग में डूबी थी अपनी सुध-बुध खोकर ।
बस यही श्याम रंग ही वास्तविक रंग है जड़ और चेतन है, बाकी सब कल्पना है ।

होली के रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं

उदय नारायण