कोरोना से सुरक्षा के लिए अब ‘आयुष संजीवनी एप’

मुख्य बातें

  • आयुष मंत्रालय की सभी एडवाइजरी से लैस है आयुष संजीवनी एप
  • 50 लाख लोगों के अनुभवों के आधार पर आंकड़े जुटाने का लक्ष्य
  • इसी आधार पर तय होगा – लोगों को कितने दिनों में हुआ फायदा

बाँदा : कोरोना वायरस यानि कोविड-19 से लोगों की रक्षा करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा आयुष मंत्रालय अब आयुष संजीवनी एप लेकर आगे आया है।

इस एप में आयुष मंत्रालय द्वारा जारी की गई सभी एडवाइजरी शामिल हैं। वहीँ इसमें लोगों के सवाल-जवाब का भी प्रावधान किया गया है जिसमें लोग अपने अनुभव साझा कर सकेंगे।

सवाल-जवाब के आंकड़ों के आधार पर यह तय होगा कि आयुष मंत्रालय की सलाह लोगों के लिए कितनी फायदेमंद साबित हो रही है और किन दिशा-निर्देशों के पालन से ज्यादा लाभ हुआ।

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डॉ. पी आर वर्मा ने बताया कि भारत में पारंपरिक चिकित्सा का लम्बा इतिहास रहा है।

खासकर इस समय जब पूरा देश कोरोना वायरस से जूझ रहा है और इस बीमारी का कोई प्रभावी टीका या इलाज नहीं है, लोग आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए देसी नुस्खे अपनाकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत कर सकते हैं।

इससे वायरस संक्रमण की सम्भावना को कम करने में मदद मिलेगी। इसी क्रम में आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद से जुड़ीं पद्धतियों पर आधारित आयुष संजीवनी एप की शुरुआत की है।

सरकार का प्रयास है कि इस एप का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार हो ताकि और लोग इसका फायदा उठाकर निरोगी काया पा सकें।

एप के जरिये 50 लाख लोगों के आंकड़े जुटाने का लक्ष्य
डॉ. पी आर वर्मा ने बताया कि आयुष संजीवनी एप के जरिये देश भर के 50 लाख लोगों के अनुभवों के बारे में आंकड़े जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है।

यह आंकड़े कोविड-19 की रोकथाम के लिए आयुष चिकित्सा प्रणालियों के उपयोग की स्वीकृति और लोगों के बीच इसके प्रभावों के आकलन में उपयोगी साबित होंगे।

उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय उच्च जोखिम वाली आबादी में कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम में आयुर्वेदिक दवाओं के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए जनसँख्या आधारित अध्ययन भी शुरू करने जा रहा है।

इससे निवारक क्षमता का पता चल सकेगा। देश में आयुष मंत्रालय के अनुसन्धान परिषदों, राष्ट्रीय संस्थानों व कई राज्यों के माध्यम से यह अध्ययन किया जाएगा। इसके तहत पांच लाख की आबादी को कवर करने की योजना है।

यह अध्ययन रिपोर्ट कोविड-19 के उपचार में आयुष पद्धति की क्षमताओं के आकलन के लिए वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर अवसरों के नए द्वार खोलेगी।

अच्छी आदतों को गले लगाएं, बुरी आदतों से करें परहेज़
आयुर्वेदिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नीरज सोनी का कहना है – संक्रमण से खुद को अपने अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए हमें अधिक ज़िम्मेदार बनने की ज़रूरत है।

अच्छी आदतों को गले लगा बुरी आदतों से परहेज़ करना होगा। रोज़ सुबह कुछ समय धूप में बिताएं। खाने में इन दिनों सहजन का उपयोग ज़रूर करें, आमला और हल्दी भी लें।

सार्वजानिक जगहों पर न थूकें और धूम्रपान बिलकुल न करें। यदि खांसी, जुकाम जैसे लक्षण हैं तो गर्म पानी में नमक और हल्दी डालकर गरारे करें और भाप लें।

कोरोना से बचने के लिए आयुष मंत्रालय की सलाह

  • दिन में बार-बार गुनगुना पानी पिएं
  • रोजाना 30 मिनट तक योगा करें
  • भोजन में हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन का इस्तेमाल करें
  • एक चम्मच या 10 ग्राम च्यवनप्राश का हर रोज सेवन करें
  • दिन में एक-दो बार हर्बल चाय/काढ़ा पियें
  • दिन में एक/दो बार हल्दी वाला दूध पियें
  • तिल या नारियल का तेल या घी सुबह-शाम नाक के छिद्रों में लगायें
  • एक चम्मच नारियल या तिल का तेल को मुंह में लेकर इधर-उधर घुमाएँ और गुनगुने पानी के साथ कुल्ला करें (थूक दें)
  • गले में खरास या सूखा कफ हो तो पुदीने की पत्तियां व अजवाइन को गर्म कर भाप लें
  • गुड़ या शहद के साथ लौंग का पाउडर मिलाकर दिन में दो-तीन बार खाएं