सेनेटरी नैपकिन वितरित कर किशोरियों को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के बारे में दी जानकारी


वाराणसी : बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के तहत सोमवार को प्राथमिक विद्यालय सिकरौल में सेवन डेज फाउंडेशन के तत्वाधान में किशोरियों को सेनेटरी पैड वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

मुख्य विकास अधिकारी मधुसूदन हुलगी, जिला कार्यक्रम अधिकारी इफ़्तेखार अहमद, बाल विकास परियोजना अधिकारी नगर मनोज कुमार गौतम के प्रयास एवं यूनियन बैंक आफ इंडिया विकास भवन के सहयोग से फाउंडेशन के द्वारा लगभग 75 किशोरियों (11 से 19 वर्ष) को सेनेटरी पैड वितरित किया गया ।

महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य देखभाल को देखते हुये किशोरियों को निःशुल्क सेनेटरी पैड वितरित किए गए। इस दौरान फाउंडेशन की अध्यक्ष कोमल गुप्ता ने महिलाओं में हो रही विभिन्न बीमारियों को लेकर छात्रों को इकोफ्रैंडली ऑरगैनिक नैपकिन के लिए जागरूक किया।

उन्होने सेनेटरी पैड के विभिन्न फायदे बताते हुए किशोरी बालिकाओं एवं महिलाओं को जागरूक किया । उन्होने कहा कि असुरक्षित कार्यप्रणाली से महिलाओं में गर्भधारण न होने सहित कैंसर व गुप्त रोग आदि बीमारियां फैल रही हैं।

हर बालिका व महिला को ईकोफ्रैंडली एंव ऑरगैनिक सेनेटरी नैपकिन का ही प्रयोग करना चाहिए जिससे उन्हें तमाम तरह की बीमारियों से बचाया जा सके। इस दौरान क्षेत्रीय मुख्य सेविका किरनलता भारती ने भी किशोरियों को जागरूक किया।

क्या है माहवारी और कैसे हो इसका प्रबंधन

माहवारी एक ऐसी शारीरिक प्रक्रिया है, जिससे संसार की हर स्त्री का सामना होता है। इसको मासिक धर्म, रजोधर्म, महीना, पीरियड कई नामों से जानते हैं। माहवारी कोई बीमारी या कोई व्याधा नहीं है।

यह भी शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है। यह एक ऐसा चक्र है, जो नियमित समय पर चलता रहता है जिस तरीके से शरीर के अन्य क्रिया जरूरी होते हैं। उसी प्रकार स्त्री के शरीर में मासिक धर्म का आना उनके शरीर की एक प्रक्रिया है।

देखा जाए तो शहरी इलाकों में इस विषय पर खुलकर चर्चा हो जाती हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में किशोरियां एवं महिलाएं बात करने में कतराती हैं क्योंकि उन्हें उनके सापेक्ष वातावरण नहीं मिल पाता है।

लेकिन इसकी भरपाई अब एएनएम, आशा, आशा संगिनी और गैर-सरकारी संस्थाओं के माध्यम से की जा रही है और वह किशोरियों को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के विषय पर जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन का कार्य कर रही हैं।

वहीं समाtज में इस बारे में फैले मिथक और भ्रांतियों को भी दूर कर रही हैं।