January 18, 2021

मलिहाबाद हत्याकांड: इन 6 घटनाओं में पुलिस की लापरवाही से हुई यह बड़ी सांप्रदायिक घटना

लखनऊ : राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत दिलावर नगर गांव में रामविलास हत्याकांड से पैदा हुआ सांप्रदायिक तनाव पुलिस की कार्यशैली पर कई सवालिया निशान लगाता है ।

यह तनाव अचानक से उत्पन्न नहीं हुआ है । तनाव की जड़ में जाएं तो आप देखेंगे कि एक के बाद एक हुई 6 घटनाओं और उसमें पुलिस द्वारा की गई लापरवाही की वजह से यह बड़ा सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ है ।

पहली घटना

24 जुलाई को खड़ौहां गांव में राम मंदिर के बारे में दो युवकों के बीच हो रही बातचीत अचानक विवाद का रूप ले लेती है और शाम होते होते दो परिवारों के बीच लड़ाई झगड़ा होता है जिसमें दोनों ही पक्षों के ऊपर मुकदमा दर्ज होता है ।

इस मामले में पीड़ित परिवार के ऊपर मुकदमा दर्ज किया जाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है । पुलिस इस मामले में सांप्रदायिक एंगल होने से इन्कार कर रही है ।

दूसरी घटना

रक्षाबंधन के दिन सहिजनां गांव में एक युवती से छेड़छाड़ होती है । छेड़छाड़ के आरोपी दूसरे समुदाय के थे इसलिए मामला काफी संवेदनशील बन गया । इस घटना में अरमान मोहसिन आमीर और साबिर 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था लेकिन अभी तक सिर्फ एक व्यक्ति को जेल भेजा गया है ।

आरोप है कि पुलिस ने बाकी के 3 लोगों के ऊपर उचित कार्रवाई नहीं की । इससे ग्रामीणों तथा हिंदू संगठनों में अंदर ही अंदर रोष व्याप्त था । उपरोक्त दोनों मामलों की जांच क्षेत्राधिकारी मलिहाबाद के द्वारा की जा रही है ।

तीसरी घटना

यह मामला भी खड़ौहां गांव से ही जुड़ा हुआ है इस मामले में एक युवक फेसबुक पर हिंदुओं के पूज्य भगवान राम पर अभद्र तथा अमर्यादित टिप्पणी पोस्ट करता है । इसमें हिंदू संगठनों ने घोर आपत्ति दर्ज की ।

इस घटना में अखिल भारतीय मानव सेवा संस्थान की तरफ से 10 अगस्त को तहरीर दी गई थी । मामले में आरोपी के ऊपर मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा जाता है ।

चौथी घटना

23 अगस्त को मलिहाबाद की रहीमाबाद चौकी के निकट गांव तरौना में प्राचीन बगिया बाबा के स्थल पर शिवलिंग तोड़ा जाता है । इस घटना पर अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है । रहीमाबाद चौकी इंचार्ज बताते हैं कि सीडीआर रिपोर्ट आने पर ही कार्रवाई संभव होगी ।

उपरोक्त चार घटनाओं में पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन जांच किसी भी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है ।

पांचवीं घटना

ग्रामीण तथा हिंदू संगठनों में व्याप्त गुस्सा उस समय उग्र हो जाता है जब दिलावर नगर में एक व्यक्ति की दूसरे समुदाय के 5 लोगों के द्वारा हत्या कर दी गयी । विरोध में पीड़ित समुदाय ने एकजुट होकर दूसरे समुदाय के घरों पर हमला बोल दिया 3 घरों में तोड़फोड़ की गई, एक बाइक जला दी गई और एक घर में आंशिक रूप से आग लगाने की भी जानकारी सामने आ रही है ।

घटना में परिजन धारा 302 में मुकदमा दर्ज करने की मांग करते हैं लेकिन क्षेत्राधिकारी मलिहाबाद के द्वारा दी गई बाइट में 112 की गाड़ी के हवाले से एक्सीडेंट की घटना बताई जाती है । क्षेत्राधिकारी के इस वीडियो से पीड़ित समुदाय को लगता है कि दूसरे समुदाय को बचाने का प्रयास किया जा रहा है ।

छठी और अंतिम घटना

इसी बीच हत्या वाली घटना के अगली सुबह सहिजनां ग्राम में मंदिर परिसर में शिवलिंग को विखंडित करके और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियों के चेहरे पर गोबर लेपने की घटना घटित हो जाती है ।

इस घटना ने आग में घी डालने का काम किया । हत्या का मामला सांप्रदायिक रूप धारण कर लेता है । रोड जाम की जाती है इसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो जाता है । पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आदित्य लंगेह द्वारा जनता को समझाने के सभी प्रयास व्यर्थ साबित होते हैं ।

पुलिस पर पथराव किया जाता है , एक समय स्थिति इतनी नाजुक हो जाती है कि पुलिस को अपने बचाव में हवाई फायरिंग करनी पड़ती है और आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़ते हैं ।

स्थितियों की अगर गहराई से पड़ताल करें तो इन सभी घटनाक्रमों में पुलिस द्वारा की गई लापरवाही से हिंदू संगठनों में अंदर ही अंदर उबाल था। इस बारे में हमने करीब एक माह पूर्व लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और क्षेत्राधिकारी मलिहाबाद को व्यक्तिगत रुप से जानकारी भी दी थी ।

उस समय अगर जनमानस की भावना को समझने का प्रयास किया गया होता और मामले की तह तक जाकर दोषियों के ऊपर कड़ी कार्यवाही की गई होती तो प्रशासन को जनता के इस तरह के विद्रोह का सामना नहीं करना पड़ता ।

हालांकि अंत में आईजी लखनऊ लक्ष्मी सिंह की सूझ बूझ तथा स्थानीय नेता मीनू वर्मा और क्षेत्रीय नेताओं के हस्तक्षेप से एक बड़ा मामला होते-होते टल गया ।

सूत्रों के अनुसार राम मंदिर निर्माण की घोषणा के बाद से क्षेत्र में कट्टर हिंदू संगठन जैसे कि बजरंग दल, दलित संगठन भीम आर्मी और मुस्लिम विचारधारा से पोषित लोगों द्वारा विरोधी उग्र कंटेंट अपने अपने समुदाय के व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से फैलाया जा रहा था ।

इस तरह के कंटेंट का एकमात्र उद्देश्य लोगों की भावनाओं को उग्र करके सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ना है । जब तक पुलिस उक्त घटनाओं की तह में जाकर स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे लोगों तथा संगठनों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करेगी तब तक कभी भी माहौल खराब हो जाने की आशंका बनी रहेगी ।

उदय नारायण