मासिक धर्म स्वच्छता दिवस विशेष:माहवारी पर जानकारी बदलेगी दुनिया सारी

मुख्य बातें

  • जनपद में बनाए जा रहे है बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड
  • स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के लिए लाभकारी बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड
  • माहवारी में स्वच्छता पर विशेष ध्यान, दूर करेंगा संक्रमण का द्वार

झाँसी : जनपद की 22 वर्षीय अदिति राकेश पिछले एक साल से किशोरियों और महिलाओं को माहवारी स्वच्छता और उसके वेस्ट मैनेजमेट के लिए जागरूक करने का कार्य कर रही है.

इसके साथ ही उनके समूह एका हाइजीन एंड वैल बीइंग के द्वारा बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड भी बनाए जा रहे है, जो स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के लिए भी सहायक है।

अदिति बताती है आज के समय में बाज़ार में जो पैड अमूमन मिल रहे है वह कई तरह के केमिकल और प्लास्टिक से बने होते है जो न सिर्फ किसी महिला के स्वास्थ्य बल्कि प्रयोग के बाद पर्यावरण के लिए भी हानिकारक होते है।

अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान अदिति ने मासिक धर्म में मीडिया की भूमिका के ऊपर शोध कार्य किया था, जिसके चलते वह पुणे के आसपास के गाँव में शोध कार्य करने गयी, शोध कार्य के दौरान उन्हे एहसास हुआ कि महिलाओं में मासिक धर्म और उस दौरान प्रयोग किए जाने वाले साधनों के बारे में सही जानकारी का अभाव है।

यही से प्रेरणा लेकर अदिति ने अपना एक समूह बनाया जिसके माध्यम से वह लोगों में जागरूकता के साथ संस्था के द्वारा बनाए गए पैड की जानकारी भी देती है, और कम दरों पर उन्हे मुहैया कराती है।

कोविड-19 के समय अदिति की टीम ने ऐसे जगहों पर जाकर पैड मुहैया कराया जहां बच्चियों के पास पैड उपलब्ध नही थे।

मेनस्ट्रअल हेल्थ अलायन्स इंडिया (एमएचएआई) के विकास समाधान की समन्वयक तान्या महाजन बताती है मासिक धर्म में स्वच्छता को बनाए रखने के लिए जानकारी और उपयोगिता के अनुसार उत्पादों के वितरण में हमेशा एक चुनौती रही है जो अब कोविड-19 के समय में और बढ़ गयी है।

एनजीओ पार्टनर के साथ हुये हमारे हालिया सर्वेक्षण के अनुसार लॉक डाउन के दौरान 84% ने कहा पैड की पहुँच या तो बिलकुल नही हैं या जद्दोजहद के बाद मिल जाते है।

वही 50% छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं ने बताया कोविड के समय वह अपनी क्षमता के अनुसार कार्य नहीं कर पा रहे हैं और 25% निर्माताओं का कार्य बिल्कुल भी चालू नहीं है क्योंकि काम करने के लिए लोग, कच्चा माल और कार्य करने के लिए पूंजी की उपलब्धता इन इकाइयों के लिए चिंताजनक है।‘’

माहवारी का प्रबंधन व निपटान

माहवारी में सूती कपड़े के पैड का उपयोग सबसे अच्छा रहता है। अगर कपड़े का पैड नहीं है तो सूती मुलायम कपड़े को पैड की तरह मोड़कर उपयोग करना चाहिए।

हर दो घंटे में पैड बदलना चाहिए। पैड बदलने के समय जननांग को पानी से धोकर सुखा ले। उपयोग किये हुए पैड को साबुन व ठंडे पानी से धोना चाहिए व् तेज धूप में सुखाना चाहिए।

ऐसा करने से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। सूख जाने के बाद पैड को एक साफ़ धुली कपड़े की थैली में मोड़कर रखें। माहवारी में उपयोग किये गए पैड या कपड़े को खुले में नहीं फेंकना चाहिये क्योंकि ऐसा करने से उठाने वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा हो सकता है।

हमेशा पैड को पेपर या पुराने अखबार में लपेटकर फेंकना चाहिये या पैड को जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़ भी सकते है।

क्या होती है माहवारी?

माहवारी एक लड़की के जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसमें योनि से रक्तस्राव होता है। माहवारी एक लड़की के शरीर को माँ बनने के लिए तैयार करती है।

एक लड़की की पहली माहवारी 9-13 वर्ष के बीच कभी भी हो सकती है। हर परिपक्व लड़की की 28-31 दिनों के बीच में एक बार माहवारी होती है। माहवारी का खून गन्दा या अपवित्र नहीं होता है।

यह खून गर्भ ठहरने के समय बच्चे को पोषण प्रदान करता है। कुछ लड़कियों को माहवारी के समय पेट के निचले हिस्से में दर्द, मितली और थकान हो सकती है। यह घबराने की बात नहीं है।

भारत में हर साल लगभग 12 बिलियन मासिक धर्म अपशिष्ट होता है एकत्रित

भारत में लगभग 33 करोड़ से अधिक महिलाएं माहवारी से होती है जिसमें से 36 प्रतिशत यानि लगभग 12 करोड़ से अधिक सैनेटरी पैड का इस्तेमाल करती है| यदि प्रति महिला हर माह 8 पैड का प्रयोग करने का अनुमान लगाया जाए तो लगभग हर माह 100 करोड़ से अधिक अपशिष्ट पैड एकत्रित होते है| यही आकंडा बढ़कर साल में करीब 12 सौ करोड़ पर पहुँच जाता है।

मेनस्ट्रअल हेल्थ अलायन्स इंडिया (एमएचएआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार अपशिष्ट प्रबंधन का सही तरीके की जानकारी या उपलब्धता न होने की वजह से ग्रामीण स्तर पर और कई जगह शहरी क्षेत्र में इस्तेमाल किए गए पैड या कपड़े को ऐसे ही खुले में फेक देती है जो पर्यावरण के हित में नही है|

वही कुछ लड़कियां सही जगह न मिल पाने के कारण कई समय तक पैड या कपड़े को प्रयोग करती है जिससे उनमें संक्रमण का खतरा बना रहता है।

मासिक धर्म के दौरान प्रयोग किए जाने वाले साधन-

मासिक धर्म एक दौरान तीन तरह साधन प्रयोग किए जाते है

  • पुनः प्रयोग किए जाने वाले साधन जैसे कि कपड़ा, मासिक धर्म कप
  • एक बार प्रयोग में लाये जाने वाले पैड, टैंपोन्स- इन साधनों में केमिकल, सुपर शोषक पॉलीमर (एसएपी) होता है।
  • एक बार प्रयोग में लाये जाने वाले पैड।

भारत में अपशिष्ट से निपटने के लिए कोई आदर्श तरीका नही है, लेकिन कुछ उपायों से हम अपशिष्ट के भर को कम कर सकते है-

• अपशिष्ट को कम करना- इसके लिए मासिक धर्म के दौरान ऐसे उत्पादों को अपनाना होगा जो पुनः प्रयोग में लाये जा सकते है।
• अपशिष्ट को निष्फल करना-प्रयोग किए जा रहे पैड को रासायनिक उपचार और ऑटोक्लेविंग तकनीक से इसके अपशिष्ट के हानिकारक कारकों को निष्फल कर सकते है।
• अपशिष्ट की भौतिक प्रकृति को बदलना- अपशिष्ट को जलाकर, गहरे गद्दे में गाढ़ कर खाद रूप में बनाकर कचरे की संरचना को बदल सकते हैं।