January 16, 2021

राष्ट्रीय युवा दिवस: हिंदू धर्म और दर्शन से दूर होता भारतीय युवा

पूरे विश्व को भारतीय अध्यात्म और दर्शन समझाने के लिए जाने जाने वाले भारत के महा ऋषि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के अवसर पर आज राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है ।

हिन्दू धर्म क्या है ईश्वर क्या है इस बारे में अगर आपको आसान और सरल भाषा में समझना है स्वामी विवेकानंद का अध्ययन करिए । निराकार और साकार ईश्वर के बारे में अगर आपको कोई भ्रम और द्वंद है तो स्वामी विवेकानंद क दर्शन आपको इससे बाहर लेकर आएगा ।

जीवन मृत्यु, सुख दुख, लोक परलोक आत्मा परमात्मा के भेद को समझाने के लिए स्वामी विवेकानंद जैसा सरल साहित्य आपको कहीं और नहीं मिलेगा । उन्होंने दुनिया को जटिल हिंदू कर्मकांड से अलग एक सरल और सुलभ ईश्वर के दर्शन कराये ।

उन्होंने गरीबों और जन सामान्य की सेवा करने की शिक्षा दी उन्होंने कहा कि परोपकार से बेहतर कोई धर्म नहीं है । उन्होंने दुनिया को धर्म और शिक्षा का असली मकसद बताया । उनका जीवन ये सिखाता है कि संघर्ष और परिश्रम के बल पर नामुमकिन को भी हासिल किया जा सकता है , ईश्वर को भी प्राप्त किया जा सकता है ।

लेकिन राष्ट्रीय युवा दिवस पर आज भारत का युवा उनकी शिक्षाओं को किस प्रकार ग्रहण कर रहा है उनके दर्शन को कितना समझ पा रहा है ।

युवा शारीरिक और मानसिक श्रम को छोड़कर सिर्फ भौतिकता वादी और सुख सुविधाओं की चीजों में ही लिप्त होता जा रहा है । यह भोग विलास और आलसपन उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है । आज बच्चों के अभिभावक चाहते हैं कि उनके बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से समृद्ध तो हों लेकिन इसके लिए उन्हें कोई संघर्ष और मेहनत ना करनी पड़ी।

वह उन्हें हर प्रकार की सुविधा देते हैं सारे गैजेट्स और भौतिक संसाधन उपलब्ध कराते हैं । लेकिन वहां उन्हें अकेले बाहर नहीं जाने देना चाहते हैं उन्हें लोगों से मेलजोल करते और अकेले बाजार करते हुए नहीं देखना चाहते हैं ।

बाहरी दुनिया और बाजार से हासिल तर्कशक्ति के बिना, थोड़ी सी चोट लगने के बाद महसूस हुए दर्द के जाने बिना हमारा बच्चा जीवन के प्रति कितना परिपक्व होगा इसका आकलन करना बहुत मुश्किल नहीं है । हर युवा चाहता है उनको एक अच्छी सी डिग्री मिल जाए और डिग्री के फलस्वरूप उन्हें एक मल्टीनेशनल कंपनी में या सरकारी कंपनी में एक शानदार पैकेज मिल जाए ।

हर कोई इंजीनियर वैज्ञानिक और डॉक्टर बनना चाहता है । क्यों कोई समाज सेवक और लेखक जैसे हसिये पर रखे हुए प्रोफेशन को नहीं अपनाना चाहता है , क्या सिर्फ इसलिए कि यहां पैकेज और भौतिक सुख सुविधाएं बहुत कम है । हमने कुछ ऐसी व्यवस्था बना दी है कि बिना एक पैकेज के जीवन का कोई अस्तित्व ही नहीं बचा है ।

क्या एक बेहतर डिग्री हमें या सिखा पाती है कि समाज के प्रति समर्पण का भाव क्या होता है । यदि ऐसा होता तो समाज सेवा के लिए प्रसिद्ध भारत के आईएएस आईपीएस जैसे प्रतिष्ठित पद भ्रष्टाचार और घूसखोरी के विवादों में न घिरते ।

मनुष्य के जीवन का उद्देश्य भौतिकता वाद जीवन और पैकेज से कहीं विशाल है । भौतिक चीजें हमें मानसिक और आत्मिक शांति नहीं प्रदान कर सकती हैं । पैसों से हम दवाई तो खरीद सकते हैं लेकिन बीमारी को आने से नहीं रोक सकते ।

यह पृथ्वी एक विद्यालय की भांति है और हम सब यहां पर नन्हे शिशुओं की तरह पढ़ रहे । आश्चर्य की बात है कि पूरी दुनिया में भारत के दर्शन और धर्म के बारे में बताने वाले स्वामी विवेकानंद को उनके देश के लोग ही बेहतर तरीके से नहीं समझ पाए हैं ।

भारतीय यह नहीं समझ पाये कि हिंदू धर्म क्या है, मनुष्य क्या है जीवन क्या है, आत्मा क्या है और परमात्मा क्या है कैसे हम खुद को अहम् ब्रह्मास्मि बना सकते हैं ।

मानव इस धरा पर कुछ समय के लिए सिर्फ सीखने और नए अनुभव ग्रहण करने के लिए आया है । मानव जन्म सिर्फ भौतिक विलासिता के लिए नहीं हुआ है ईश्वर प्राप्ति और जनकल्याण जैसे विशालकाय उद्देश्य जिस दिन मानव की समझ में आ जाएंगे उस दिन वास्तव में रामराज्य स्थापित हो जायेगा ।