April 23, 2021

नाइट ब्लड सर्वे अभियान से दूर भगाएंगे फाइलेरिया

मुख्य बातें

  • आठ स्थानों से नमूना लेकर तैयार की जा रही स्लाइड
  • 30 अप्रैल तक 4000 लोगों के लिए जाना है सैंपल

बांदा : फाइलेरिया के मरीजों की पहचान के लिए नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम शुरू हो गया है। 30 अप्रैल तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 4000 लोगों के खून का नमूना जमा कर उसकी जांच की जाएगी।

रक्त का नमूना लेने के लिए जिले के आठ स्थानों का चयन किया गया है। आठ टीमें बनाई हैं। सैंपलिंग में मदद के लिए आशा, संगिनी व बीसीपीएम को भी लगाया गया है।

जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि जिले के छह गांवों और शहर के दो क्षेत्रों को फाइलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील घोषित किया गया है।

इन क्षेत्रों में टीम ने नाइट ब्लड सर्वे शुरू करवा दिया है। मई माह में फाइलेरिया से रोकथाम को दवा खिलाने का अभियान प्रस्तावित है। इसलिए इससे पूर्व यह सर्वे कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मलेरिया विभाग की टीम रात में गांवों में ब्लड सैंपल लेने के लिए सर्वे कर रही है। रात में सैंपल लेने की वजह यह है कि बीमारी का कीटाणु रात में ही पेरीफेरल (बाहरी) ब्लड में आता है।

हर गांव से करीब पांच सौ लोगों का ब्लड सैंपल टीम को जुटाना है। इस तरह आठ क्षेत्रों से चार हजार सैंपल लेने हैं। प्रत्येक टीम में चार सदस्य शामिल हैं।

मुख्य चिकित्साधिकारी डा.एनडी शर्मा का कहना है कि माॅस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम से पूर्व नाइट ब्लड सर्वे कार्यक्रम संचालित किया गया है। जिले में 4000 लोगों के ब्लड की स्लाइड तैयार कराकर उसकी जांच कराई जाएगी।

संवेदनशील क्षेत्रों में हो रहा सर्वे

स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल जिले में बड़ोखर ब्लाक के जमालपुर गांव, कमासिन में बंथरी, तिंदवारी में पपरेंदा, जसपुरा में गड़रिया, नरैनी में कालिंजर और महुआ में गुमाई गांव तथा शहरी क्षेत्र में गायत्री नगर व स्वराज कालोनी को संवेदनशील इलाकों में चिन्हित किया गया है। इन आठ क्षेत्रों में नाइट ब्लड सर्वे हो रहा है।

क्या है फाइलेरिया

फाइलेरिया मच्छर से फैलने वाला एक रोग है। इसका मच्छर गंदे पानी में पैदा होता है। इस बीमारी को सील पांव या हाथी पांव भी कहते हैं।

इस बीमारी का लक्षण पांच से छह वर्ष के बाद दिखाई देता है। इस बीमारी में शरीर के किसी भी अंग में सूजन और सफेदी आ सकती है।