September 27, 2020

पोषण माह-सिखाया हाथ धोने का सही तरीका व बताया ‘सुमन-के’ का महत्व

मुख्य बातें
• नये प्रयासों से दूर होगा कुपोषण
• पोषण वाटिका बनाने और पोषणयुक्त आहार लेने पर ज़ोर

वाराणसी : राष्ट्रीय पोषण माह के तहत कुपोषण को जड़ से मिटाने की सोच के साथ पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

आईसीडीएस सुपरवाइज़र और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समुदाय में हाथ धुलाई का तरीका सिखा रही हैं। इसके साथ ही सभी को हाथ धोने की कारगर विधि ‘सुमन-के’ का महत्व भी बता रही हैं।

सेवापुरी ब्लॉक के अमीनी ग्राम आंगनबाड़ी केंद्र पर क्षेत्रीय सुपरवाइज़र रेणु पांडे द्वारा किशोरियों, धात्री माताओं और बच्चों को विस्तार से हाथ धुलाई का तरीका बताया गया।

इसके अतिरिक्त पोषण माह का शुभारंभ ग्राम प्रधान विजय पटेल और खंड शिक्षा अधिकारी दुर्गा प्रसाद सिंह द्वारा किया गया। इस दौरान छह माह से ऊपर के सभी बच्चों का अन्नप्राशन किया गया।

कोरोना से रोकथाम और बचाव के नियमों को ध्यान में रखते हुये सभी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। रेणु पांडे ने बताया कि सुमन-के को छह चरणों में समझा जा सकता है।

S-सीधे हाथ पर साबुन लगाकर रगड़ना, U-उल्टे हाथ, M-मुट्ठी, A-अंगूठा, N-नाखून पर साबुन लगाकर धोना और आखिर में K-कलाई धोना चाहिए। इस तरह से अगर हम अपने हाथों को धोएंगे तो हम कोरोना के साथ-साथ अन्य बीमारियों से भी बच सकते हैं।

इसके साथ हाथों को कम से कम 40 सेकंड तक जरूर धोना चाहिए। हैंडवॉश को अपनी आदत में जोड़ना बहुत जरूरी है। खाना बनाने व खाने से पहले, शौच के बाद अपने हाथों को साबुन से अच्छे से धोना चाहिए।

धोने के बाद हाथों को कपड़े से पोंछने के बजाय हवा में ही सुखाना चाहिए। सेवापुरी ब्लॉक की बाल विकास परियोजना अधिकारी सुषमा सिंह ने बताया कि पोषण माह का उद्देश्य पाँच साल तक के बच्चों, गर्भवती/धात्री महिलाओं के कुपोषण को प्रभावी ढंग से दूर करना है ताकि कुपोषण से होनी वाली बीमारियों व मृत्युदर को कम किया जा सके।

इस अभियान के दौरान जिले में कुपोषित/अति कुपोषित बच्चों, एनीमिया की शिकार महिलाओं, किशोरियों और बालिकाओं को चिन्हित कर पोषण वाटिका लगाने, पौष्टिक भोजन का सेवन करने, छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने तत्पश्चात अन्य पौष्टिक आहार लेने के बारे में बताया जाएगा। साथ ही नियमित तौर पर उनकी देखरेख की जाएगी।


गर्भवती को कर रही हैं प्रेरित

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा धात्री महिलाओं को प्रेरित किया जा रहा कि सहजन की सब्जी, सूप आदि का प्रयोग करने से उनका स्वास्थ्य तो उत्तम होगा ही जन्में बच्चे भी स्वस्थ होंगे। इतना ही नहीं केंद्र के नौनिहालों को भी इसका सेवन कराया जाएगा ताकि उन्हें विटामिन युक्त आहार मिल सके।