March 19, 2020

संजीवनी साबित हो रहा पोषण पुनर्वास केंद्र

मुख्य बातें

  • इस वर्ष 1,002 बच्चों को किया गया कुपोषण से मुक्त
  • प्रदेश में ललितपुर एक मात्र ऐसा जिला जिसके हर ब्लाक में है पोषण पुनर्वास केंद्र

ललितपुर : ब्लाक जखौरा के बस्वान गाँव निवासी मालती की दो वर्षीय पुत्री द्रौपती को बुखार और दस्त के चलते आशा द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा गया था| द्रौपती को 13 फरवरी को भर्ती किया गया था और सेहत में सुधार के बाद 29 फरवरी को केंद्र से छुट्टी कर दी गयी .

भर्ती के समय उसका वज़न 5.975 किलो था और 17 दिन पोषण पुनर्वास केंद्र में गुजारने के बाद उसका वज़न 7.190 हो गया| मालती सहेरिया आदिवासी बस्ती से ताल्लुक रखती हैं|

वहीँ दूसरा केस एक वर्षीय तरुण का है जो जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में पिछले 20 दिन से भर्ती था| आज उसे केंद्र से छुट्टी मिल गई|

तरुण को पिटिंग एडिमा था अर्थात पैरों में सूजन होना| भर्ती के समय तरुण का वज़न 6 किलो था जो बढ़ कर 7 किलो 100 ग्राम हो गया है|

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रताप सिंह बताते हैं प्रदेश में ललितपुर ऐसा जनपद है जहाँ हर ब्लाक पर पोषण पुनर्वास केंद्र है| कुपोषित बच्चे को नजरंदाज करना आगे चल कर खतरनाक साबित हो सकता है|

एनआरसी में बच्चे के भर्ती होने के मानक

एनआरसी नोडल डॉ हुसैन खान बताते हैं पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने के तीन मानक हैं –
लम्बाई के आधार पर वज़न कम हो,
• बच्चे की मिड अपर आर्म सर्कमफेरेंस का माप 11.5 सेंटीमीटर से कम हो या
• दोनों पैरों में पिटिंग एडिमा अर्थात पैरों में सूजन

अभिभावक को मिलता हैं दैनिक भत्ता

डॉ हुसैन बताते हैं इस वित्तीय वर्ष में जनपद में 1,002 बच्चों को कुपोषण से मुक्त किया गया है| राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीमें प्राथमिक विद्यालयों एवं आँगनबाड़ी केन्द्रों में जा कर बच्चों की जाँच कर उन्हें चिन्हित करती है|

साथ ही आशा एवं आंगनवाडी कार्यकर्ता द्वारा बच्चे को केंद्र लेकर आती है| बच्चे के साथ रह रही माँ या उसके अभिभावक को दैनिक भत्ते के रूप में प्रति दिन 50 रुपया दिए जाते हैं और साथ ही दोनों समय का खाना भी मिलता है| उन्हें केंद्र पर बच्चे के लाने और ले जाने के भत्ते के रूप में 100 रूपये दिए जाते हैं|

वह बताते हैं केंद्र पर पांच वर्ष से कम व् अति कुपोषित बच्चे भर्ती किये जाते हैं| यहाँ उन्हें 14 दिन रखा जाता है गंभीर मामलों में इस अवधि को बढ़ा भी दिया जाता है| जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में एक बार में 10 बच्चे भर्ती होने की सुविधा है|

साथ ही इन बच्चों की देखभाल के लिए 1 डॉक्टर, 3 स्टाफ नर्स, 1 केयर टेकर, 1 कुक, 1 फीडिंग डेमोस्त्रेटर, 1 स्वीपर कार्यरत है|

डाईटीशियन दीपिका बताती हैं बच्चों को मेन्यू के आधार पर खाना दिया जाता है| मुख्यतः उन्हें दूध, खिचड़ी और दलिया ही दिया जाता है|