बीजेपी के लिए गले की हड्डी साबित होती प्रज्ञा ठाकुर

लखनऊ : हर पार्टी के अंदर कुछ संकट मोचक होते है और कुछ विभीषण भी । भारतीय जनता पार्टी के भीतर विभीषण का रोल साध्वि प्रज्ञा बखूबी निभा रही है । प्रज्ञा ठाकुर अपने विवादित बयानों के चलते लगातार सुर्खियों में रहती हैं ।

कभी-कभी तो उनके बयान पार्टी के लिए गले की हड्डी बन जाते हैं । प्रज्ञा ने लोकसभा चुनाव के दौरान नाथूराम गोडसे को अहिँसा की लाइन में खड़ा करके बीजेपी को बेबसी की स्तिथि में ही खड़ा कर दिया था खुद प्रधानमंत्री ही नज़रे चुराकर साध्वि को कभी ना माफ करने की बात बोले थे ।

लेकिन चुनाव परिणाम के बाद उनकी विवादों को भुलाकर उन्हें रक्षा मंत्रालय जैसे संवेदनशील मंत्रालय में सलाहकार समिति का सदस्य बना कर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की गई । लेकिन पार्टी की तरफ से दिया गया यह ईनाम आलोचनाओं के घेरे में रहा ।

पुराने मामले अभी शांत हुए नहीं थे कि एक बार फिर से साध्वि प्रज्ञा के सुर बेसुरे हो गए, इस बार लोकसभा के भीतर ही गोडसे को देशभक्त करार दे दिया । महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी अपनी किरकिरी के दर्द से उभर नही पाई है और उस पर नमक छिड़कने का काम साध्वी ने कर दिया है ।

हालांकि उनके इस नए बयान से उनको सलाहकार समिति से बाहर कर बड़ी कार्रवाई कर सख्त संदेश दिया गया है । लेकिन लोकसभा में उनकी जीत वोटर्स पर भी कई सवाल खड़े करती है । आखिर कैसे जनता नें इस तरह की विचारधारा रखने वाले प्रत्याशी को लोकसभा तक पहुंचा दिया ।

सत्य,अहिंसा,ईमानदारी के विचारधारा वाले गांधीजी के विचारों को लेकर बीजेपी को अपना स्टैंड क्लियर करना होगा वरना साध्वी जैसी खतरनाक सोच पार्टी और जनता को गड्ढे में ही डालेगी ।

भरत गुप्ता
लेखक स्वतंत्र पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता है।

तथा पूर्व में सहारा समय और दूरदर्शन में कार्यरत रहे हैं ।