March 24, 2020

माता के स्वागत की यूं करें तैयारी,आवश्यक बातों का रखें ध्यान

चैत्र नवरात्रि 2020 : नवरात्रि शक्ति की प्रतीक मां दुर्गा की उपासना का पर्व है. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाले ‘वासन्तिक’ नवरात्रि के साथ ही हिन्दू नववर्ष का भी शुभारम्भ होता है।

नौ दिनों तक मनाये जाने वाले इस पर्व में प्रत्येक दिन मां दुर्गा के विभिन्न नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस बार नवरात्रि का आरंभ 25 मार्च, बुधवार से हो रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व है।

घटस्थापना के बाद से ही नवरात्रि का प्रारंभ माना जाता है। शास्त्रों में कलश को भगवान गणेश की संज्ञा दी गई है और किसी पूजा के लिए सर्वप्रथम गणेश जी की वंदना की जाती है। आइए जानते हैं कलश स्थापना के नियम और विधि क्या है?

कैसे करें घट स्थापना

  • घर में उत्तर-पूर्व दिशा कलश स्थापना के लिए उपयुक्त होती है। इसके लिए घर के उत्तर-पूर्वी हिस्से में अच्छे से साफ-सफाई करनी चाहिए।
  • घट स्थापना वाले स्थान को गंगा जल से स्वच्छ करें और जमीन पर साफ मिट्टी बिछाएं, फिर उस साफ मिट्टी में घी, रोली और शहद की कुछ मात्रा मिलाएं फिर मिट्टी पर जौ बिछाएं। इसके बाद फिर से उसके ऊपर साफ मिट्टी की परत बिछाएं और उस मिट्टी के ऊपर गंगा जल छिड़कना चाहिए। फिर उसके ऊपर कलश स्थापित करना चाहिए।
  • गले तक कलश को शुद्ध जल से भरना चाहिए और उसमें एक सिक्का रखना चाहिए। कलश के जल में गंगा जल अवश्य मिलाएं। अगर संभव हो तो कुछ और पवित्र नदियों का जल भी आप कलश के जल में मिला सकते है। इसके बाद कलश पर अपना दाहिना हाथ रखकर इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

गंगे! च यमुने! चैव गोदावरी! सरस्वति!
नर्मदे! सिंधु! कावेरि! जलेSस्मिन् सन्निधिं कुरु।।

मंत्र ना बोल पाए तो क्या करें

  • अगर आप मंत्र नहीं पढ़ना चाहते है तो आप बिना मंत्र के ही गंगा, यमुना, कावेरी, गोदावरी, नर्मदा आदि पवित्र नदियों का ध्यान करें और साथ ही वरूण देवता का भी ध्यान करना चाहिए।
  • इसके बाद कलश के मुख पर कलावा बांधे और फिर इसके मुख पर कुछ आम के पत्ते रखें फिर एक कटोरी से कलश को ढ़क देना चाहिए। इसके बाद ढकी गई कटोरी में चावल भरिए।
  • इसके बाद एक नारियल ले उसे लाल कपड़े से लपेटकर कलावें से बांध देना चाहिए। फिर उस नारियल को चावल से भरी हुई कटोरी के ऊपर स्थापित कर देना चाहिए।

कलश के सामने मां दुर्गा का चित्र रखें और अखंड ज्योत जलाकर रखें. इसके बाद माता दुर्गा की पूजा आरंभ करें.

पूजन सामग्री

मिष्ठान, पंच मेवा, रुई, कलावा, रोली सिंदूर, 2 नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, 5 सुपारी, लॉंग, पान के पत्ते, घी, चौकी, कलश, आम का पल्लव, कमल गट्टे, पंचामृत, कुशा, रक्त चंदन, श्रीखंड चंदन, जौ, तिल.

नवरात्रि के 9 दिनों में होती हैं इन नौ देवियों की पूजा

  • पहला दिन- देवी शैलपुत्री
  • दूसरा दिन- ब्रह्मचारिणी
  • तीसरा दिन- चंद्रघंटा
  • चौथा दिन- कूष्मांडा
  • पांचवा दिन- स्कंद माता
  • छठा दिन- कात्यायिनी
  • सातवां दिन- कालरात्रि
  • आठवां दिन- महागौरी
  • नौवां दिन- सिद्धिदात्री