वाराणसी: गया प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस

मुख्य बातें

नि:शुल्क हुईं सभी प्रसव पूर्व जांचें

उच्च जोखिम गर्भावस्था वाली महिलाओं को किया गया चिन्हित

दिया गया परिवार नियोजन-खुशहाल परिवार के लिए परामर्श

वाराणसी : मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने, गर्भवती की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल, प्रसव पूर्व जांच एवं उन्हें समय पर उचित इलाज मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस प्रत्येक माह की नौ तारीख को मनाया जाता है ।

इसी क्रम में मंगलवार को जनपद के जिला महिला चिकित्सालय कबीरचौरा, लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय रामनगर सहित ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के सभी प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों व उपकेन्द्रों पर पीएमएसएमए दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया ।

इस दौरान स्वास्थ्य केन्द्रों पर आईं गर्भवती की महिला चिकित्सकों द्वारा प्रसव पूर्व सभी जाँचें, ब्लड टेस्ट, यूरिन जांच, ब्लड प्रेशर, मधुमेह, सिफ़लिस, हीमोग्लोबिन जांच, अल्ट्रा साउंड की निःशुल्क सुविधा दी गई एवं परिवार नियोजन-खुशहाल परिवार के लिए परामर्श भी दिया गया ।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वीबी सिंह ने नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लल्लापुरा, माधोपुर एवं दुर्गाकुंड का निरीक्षण किया । इस दौरान उन्होने महिला चिकित्सकों सहित एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि वह ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच के लिए प्रेरित करें और उन्हें केंद्र तक लेकर आयें।

उन्होने बताया कि जांच के बाद उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) वाली महिलाओं को चिन्हित किया गया और उच्च स्तरीय इकाई पर संदर्भित किया गया एवं निःशुल्क दवा, आवश्यक चिकित्सीय व पोषण परामर्श भी दिया गया ।

एसीएमओ डॉ एके मौर्य ने नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य बजरडीहा, माधोपुर एवं स्वामी विवेकानंद राजकीय चिकित्सालय भेलूपुर का निरीक्षण किया ।

इसके साथ ही सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर एक अलग स्टॉल लगाकर परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत खुशहाल परिवार के उद्देश्य से जरूरी परामर्श देने की शुरुआत भी की गयी जिसमें महिलाओं को स्थायी और अस्थायी साधनों को लेकर जानकारी दी गयी ।

एसीएमओ डॉ पीपी गुप्ता ने काशी विद्यापीठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मनाए जा रहे पीएमएसएमए दिवस का निरीक्षण किया । डिप्टी सीएमओ डॉ उमाशरण ने नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजघाट व बड़ी बाजार का निरीक्षण किया । नगरीय स्वास्थ्य समन्वयक आशीष सिंह ने शहरी पीएचसी अर्दली बाजार और चौकाघाट का निरीक्षण किया ।

इस दिवस पर निजी क्षेत्र से स्वयं सेवा करने वाले चिकित्सकों द्वारा भी काफी सराहनीय सहयोग किया गया जिसमें महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ – डॉ श्वेता मिश्रा, डॉ स्मिता टंडन, डॉ सारिका सिंह, डॉ मधु माहेश्वरी, डॉ शिखा व बीएचयू की टीम द्वारा बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया गया ।

इस दिवस पर आज अराजीलाइन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 191 महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) जांच की गई जिसमें 38 महिलाएं एचआरपी के लिए चिन्हित की गईं।

इसके साथ ही बड़ागांव सीएचसी पर 141 महिलाओं की एएनसी जांच में 17 एचआरपी, चिरईगांव पीएचसी पर 177 महिलाओं की एएनसी जांच में 17 एचआरपी, चोलापुरा सीएचसी पर 122 महिलाओं की एएनसी जांच में 14 एचआरपी, हरहुआ पीएचसी पीएचसी पर 152 महिलाओं की एएनसी जांच में 15 एचआरपी, काशी विद्यापीठ पीएचसी पर 156 महिलाओं की एएनसी जांच में 14 एचआरपी, पिंडरा पीएचसी पर 247 महिलाओं की एएनसी जांच में 40 एचआरपी तथा सेवापुरी पर 125 महिलाओं की एएनसी जांच में 27 एचआरपी, एलबीएस चिकित्सालय 32 महिलाओं की एएनसी जांच में 5 एचआरपी और जिला महिला चिकित्सालय में 272 महिलाओं की एएनसी जांच में 54 महिलाओं को एचआरपी के लिए चिन्हित किया गया । इस तरह से कुल 1615 महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गयी जिसमें 241 एचआरपी चिन्हित की गईं।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश प्रसाद ने बताया कि इस दिन मुख्य रूप से एचआरपी के लिए चिन्हित की सभी महिलाओं को विशेष चिकित्सीय परामर्श प्रदान किया गया और उन्हें स्वस्थ एवं संतुलित खान-पान, आयरन की गोली खाने के लिए सलाह भी दी गई ।

इसके साथ ही दिवस में आयी सभी गर्भवती के लिए सूक्ष्म जलपान की व्यवस्था की गयी । उन्होने बताया कि इस योजना के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत रेडियोलोजिस्ट को भी जोड़ा गया है जो अपने केन्द्रों पर गर्भवती को निःशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा प्रदान करते हैं ।

जिला महिला स्वास्थ्य परामर्शदाता पूनम ने बताया कि दिवस के दौरान यदि किसी गर्भवती में कोई गंभीर लक्षण जैसे तेज बुखार, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखना, त्वचा का पीलापन होना, दौरे पड़ना, उच्च रक्तचाप, योनि से रक्तस्राव, हाथ पैरों या चेहरे पर सूजन, भ्रूण का कम हिलना या निकलना आदि दिखते हैं तो उनके एमसीपी कार्ड पर लाल मोहर लगा दी जाती है ताकि स्वास्थ्य इकाइयों पर प्राथमिकता के आधार चिकित्सीय सुविधा दी जा सके और सुरक्षित प्रसव कराया जा सके ।