January 15, 2021

टीबी हारेगा – देश जीतेगा अभियान

जिले में अब तक 60 बच्चों को लिया गया गोद

ललितपुर : प्रधानमंत्री के वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने के सपने के तहत साल 2019 में शून्य से 18 वर्ष तक के टीबी पीड़ित बच्चों को स्वेच्छा से गोद लेने का अभियान शुरू हुआ था|

इसके अंतर्गत सर्व प्रथम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने टीबी पीड़ित बच्ची को गोद लिया था| जनपद में भी विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं एवं विभागों द्वारा टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लिया गया है|

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ जे एस बक्शी ने बताया कि टीबी (क्षय रोग) एक घातक संक्रामक रोग है जो कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है।

टीबी आम तौर पर ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है।

जब क्षय रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक बूँदें निकलतीं हैं जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है। यह बूँदें कई घंटों तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं।

जब एक स्वस्थ्य व्यक्ति हवा में घुले हुए इन माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई के संपर्क में आता है तो वह इससे प्रभावित हो सकता है।

सक्रिय टीबी के मरीज को अपने मुँह पर मास्क या कपड़ा लगाकर बात करनी चाहिए और मुँह पर हाथ रखकर खाँसना और छींकना चाहिए।

टीबी का एक प्रमुख लक्षण है खांसी। अगर किसी को दो हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी हो तो इसे नजरअंदाज न करें। खांसी में खून आना, सीने में दर्द या सांस लेने और खांसने में दर्द होना, लगातार वजन कम होना, चक्कर आना, रात में पसीना आना, ठंड लगना, भूख न लगना भी टीबी के लक्षण हो सकते हैं।

जनपद निवासी राजकुमार साहू बताते हैं कि उनके पुत्र को उस वक्त नियुक्त जिलाधिकारी द्वारा गोद लिया गया था| वह स्वयं घर आकर उनके पुत्र का मनोबल बढ़ाये और साथ ही फल और दवाई का इन्तेजाम भी किया गया था|

उन्होंने बताया की इलाज 6 माह तक चला था और अब उनका पुत्र एक दम ठीक है और पढाई के लिए भोपाल में रहता है| वह बताते है उनके पुत्र को टाइफाइड हुआ था उसके बाद लगातार खांसी रहती थी, इसके बाद बलगम की जाँच कराने पर टीबी की पुष्टि हुई थी|

इस वक्त जिले में सघन टीबी रोगी खोज अभियान चलाया जा रहा है| यह अभियान 2 जनवरी से 12 जनवरी तक चलेगा| इसके लिए विभाग की 116 टीमें लगी हुईं है जो जनपद की 20 प्रतिशत आबादी यानि लगभग 2,85,300 से अधिक लोगों तक टीमें पहुँच रही हैं| 2 जनवरी से शुरू हुए इस अभियान में 61 लोगों में टीबी की पुष्टि हुई है|

जिला कार्यक्रम समन्वयक शिव निरंजन ने बताया कि 27 से 31 दिसंबर तक जिला कारागार में कैदियों और वृद्धाश्रम में रहने वाले वृद्धजनों के स्वास्थ्य की जांच की गई। जेल के 350 बंदियों की स्क्रीनिंग में 37 बंदियों के सैंपल लेकर जांच को भेजे गए जिसमें एक टीबी का मरीज मिला|इसी प्रकार वृद्धाश्रम में 50 वृद्धजनों की सैंपलिंग की गई जिसमें किसी को भी टीबी की पुष्टि नहीं हुई|

जिला कार्यक्रम समन्वयक ने बताया अगस्त 2019 से लेकर नवम्बर 2020 तक 68 बच्चों के सापेक्ष 60 बच्चों को जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी एवं अन्य विभाग द्वारा गोद लिया गया है|

इसके अंतर्गत उनके इलाज का फॉलो अप, फल आदि का खर्च स्वेछ्चा से किया जाता है| अभी तक 58 बच्चों को टीबी मुक्ति मिल चुकी है|