January 25, 2021

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से किसानों को है एतराज़,जानें क्या है वजह?

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों कृषि कानूनों पर अपना फैसला सुनाया है. फैसले में कोर्ट ने अस्थाई रूप से तीनों क़ानूनों पर रोक लगाते हुए चार सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया है. इस कमेटी को इस मामले का हल निकालने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है।

चार सदस्यों वाली कमेटी को प्रदर्शनकारी किसानों और उनके नेताओं से बातचीत करके मसले को सुलझाने की कोशिश करना है. हालांकि कमेटी को कोई फैसला देने का अधिकार नहीं है. कमेटी अपना सुझाव सुप्रीम कोर्ट को सौपेंगी.

सुप्रीम कोर्ट की ओर से मध्‍यस्‍थता के लिए कमेटी गठित कर दिए जाने से भी मामला सुलझा नहीं है. किसान कानूनों को रद्द किए जाने के अलावा कोई भी बात मानने को राजी नहीं हैं. यहां तक कि उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 4 सदस्‍यीय कमेटी पर भी नाराजगी जाहिर की है.

आंदोलनकारी किसानों का स्‍पष्‍ट कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा अपने पूर्व के फैसले के लिहाज से किसी भी कमेटी के प्रस्ताव को खारिज कर चुका है, यानि उन्‍हें यह कतई स्‍वीकार नहीं है.

किसानो का कहना है कि चाहे यह कमेटी कोर्ट को तकनीकी राय देने के लिए बनी है या फिर किसानों और सरकार में मध्यस्थता के लिए, किसानों का इस कमेटी से कोई लेना-देना नहीं है.’

उन्‍होंने आगे कहा, ‘कोर्ट ने जिन चार सदस्यों की कमेटी घोषित की है उसके सभी सदस्य इन तीनों कृषि कानूनों के पैरोकार रहे हैं और पिछले कई महीनों से खुलकर इन कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने की असफल कोशिश करते रहे हैं.

किसानो ने यहां तक कहा कि ‘यह अफसोस की बात है कि देश के सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मदद के लिए बनाई इस कमेटी में एक भी निष्पक्ष व्यक्ति को नहीं रखा है’.

कमेटी में शामिल हैंं ये चार सदस्य

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई इस कमेटी में भारतीय किसान यूनियन (मान) के प्रमुख भूपिंदर मान सिंह, महाराष्ट्र शेतकरी संगठन के प्रमुख अनिल धनवत, इंटरनेशनल पॉलिसी के प्रमुख डॉ. प्रमोद कुमार जोशी और एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट अशोक गुलाटी शामिल हैं.