KGMU में हुआ ट्रायल,कोरोना मरीजों के लिए सबसे कारगर है प्लाज्मा थेरेपी

लखनऊ : केजीएमयू और पीजीआई में प्लाज्मा थेरेपी को लेकर लगातार तैयारियां चल रही हैं। खुलासा हुआ है कि प्लाज्मा थेरेपी से मरीज पर किसी तरह का दुष्प्रभाव नहीं होता है। थेरेपी देने के दूसरे दिन ही मरीज में संक्रमण की दर कम हो जाती है।

जॉन्स हॉकिन्स यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए शोध में बताया गया कि मार्च में 50 गंभीर रूप से बीमार मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई। इसमें से 30 मरीजों में थेरेपी देने के दूसरे दिन काफी सुधार पाया गया।

तो ऐसे में चिकित्सा विशेषज्ञ प्लाज्मा थेरेपी को कोरोना मरीजों के लिए सबसे कारगर बता रहे हैं.

यह शोध रिपोर्ट ऐसे वक्त आई है कि जब राजधानी के केजीएमयू और पीजीआई में प्लाज्मा डोनेशन को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों ने काम शुरू कर दिया है।

ICMR की ओर से केजीएमयू और पीजीआई को प्लाज्मा का ट्रायल करने के लिए संस्तुति भी मिल चुकी है।

6 लोगों ने डोनेट किया प्लाज्मा

केजीएमयू ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि कोरोना से ठीक होने वाले छह लोग प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। कई लोगों ने पंजीयन कराया है। प्लाज्मा दान करने से मरीज को किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।

विभिन्न शोध रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि प्लाज्मा थेरेपी गंभीर मरीजों के इलाज के लिए सबसे कारगर है। ऐसी स्थिति में ज्यादा से ज्यादा लोगों से प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की गई।

बता दें कि केजीएमयू में कोराना पॉजिटिव मिले उरई के डॉक्टर की हालत गंभीर होने पर प्लाज्मा थेरेपी दी गई थी। इसके बाद उनका संक्रमण कम हो गया था।

कोरोना की रिपोर्ट भी निगेटिव आ गई थी लेकिन यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और लिवर फेल्योर की वजह से उनकी मौत हो गई थी।