लॉकडाउन में बंद यूपी की सबसे बड़ी फूल मंडी, बेहाल किसान सड़ रहे फूल

उदय बी यादव

लखनऊ : आज कोरोना महामारी के दौरान चल रहे लॉकडाउन में फूल की खेती करने वाले किसानों की कमर तोड़कर रख दी है । सभी तरह के मांगलिक व धार्मिक कार्यक्रम बंद होने की वजह से फूलों की मांग बिल्कुल बंद है ऐसे में फूल की खेती करने वाले किसान अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं ।

लॉकडाउन के चलते फूल की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है । गेंदा की खेती करने वाले अंशू कहते हैं कि हमारी पूरी खेती खराब हो चुकी है लाखों रुपयों की लागत लगाकर तैयार हुए फूल खेतों में सड़ रहे हैं।

अंशू उत्‍तर प्रदेश के लखनऊ जिले के मलिहाबाद ब्लाक के छोटे से गांव मवई कलां के रहने वाले हैं। अंशू भूमिहीन किसान हैं, जो बटाई के तौर पर खेती करते हैं । बटाई खेती में किसान फसल की पैदावार का एक निश्चित हिस्सा खेत के माल‍िक को देकर उसके खेत में काम करता है ।

अंशू ने गांव के संदीप सिंह की जमीन पर लगभग एक बीघे 27000 वर्ग फुट में फूल की खेती की थी। उन्‍हें उम्‍मीद थी कि इस बार फूल की खेती से करीब 80 से 90 हजार रुपए न‍िकल आएंगे, लेकिन कोरोना संक्रमण की वजह से लगे लॉकडाउन ने उनकी उम्‍मीद पर पानी फेर दिया है।

फूल की खेती करने वाले किसान चंद्रपाल बताते हैं लॉकडाउन ऐसे समय पर आया जब हमारी सहालग शुरू हो रही थी । शादी बारात में फूल की भारी मांग के चलते उन्हें अच्छा मुनाफा होता है । वह कहते हैं कि इस 2 महीने की कमाई से ही हम फूल की खेती करने वाले किसानों का पूरे साल का खर्चा चलता है ।

कुछ ऐसी ही हालत उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी फूल मंडी लखनऊ की है । थोक कारोबारी और लखनऊ फूल व्यापार कल्याण समिति के अध्यक्ष नदीम (45) बताते हैं कि 2020 फूल के कारोबारियों के लिए एक नई आफत लेकर आया ।

व्यापारियों के विरोध के बावजूद साल की शुरुआत में ही मंडी को गोमती नगर के किसान बाजार में शिफ्ट कर दिया गया । गोमती नगर जैसे पॉश इलाके में माल लाने व ले जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन ना के बराबर है ।

मंडी गोमती नगर में शिफ्ट होने की वजह से सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना छोटे किसानों को करना पड़ रहा है जो थोड़े बहुत रूपये खर्च करके सार्वजनिक परिवहन से मंडी तक पहुंच जाते थे अब उनका इस पॉश इलाके में पहुंचना असंभव हो गया ।

सार्वजनिक परिवहन न होने के कारण हम लोग पहले से ही कारोबार में भयंकर घाटे का सामना कर रहे थे । अब लॉकडॉउन की दोहरी मार ने हमारी कमर तोड़कर रख दी है । फूल कारोबारी सलीम खान बताते हैं कि लॉक डाउन के चलते प्रतिदिन 12 से 15 लाख रुपए का कारोबार प्रभावित हो रहा है ।

वह कहते हैं कि बड़े कार्यक्रमों पर लंबे समय तक रोक लगने की उम्मीद है यदि ऐसा होता है तो अगले कई महीनों तक इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के कारोबार की उम्मीद नहीं की जा सकती है । किसानों को महंगे फूलों को काटकर जानवरों को खिलाना पड़ रहा है ।

ऐसी स्थिति में यदि सरकार ने हमारी कोई सहायता नहीं की तो फूलों के कारोबार से जुड़ा हर व्यक्ति बर्बाद हो जाएगा ।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश भारत के सबसे बड़े फूलों के उत्पादकों में से एक है, उत्तर प्रदेश की लखनऊ मंडी से भारत के कई हिस्सों और यहाँ तक कि मध्य पूर्व में भी फूल भेजे जाते हैं।

बाराबंकी के मोइनुद्दीन तथा गोंडा के वैभव पांडे पॉलीहाउस में उगने वाले सजावटी फूल जरबेरा के बड़े उत्पादकों में से एक हैं । जरबेरा एक विदेशी और सजावटी फूल है, जो पूरी दुनिया में उगाया जाता है। इसे ‘अफ्रीकन डेजी’ या ‘ट्रांसवाल डेजी’ के नाम से भी जाना जाता है । मोइनुद्दीन बताते हैं कि लॉकडाउन के चलते उत्तर प्रदेश के फूल किसानों को कम से कम 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की संभावना है ।