January 25, 2021

क्या कुछ बदलेगा, या 20 और 21 का सिर्फ एक आंकड़ा बनकर ही रह जायेगा यह नव वर्ष

Flipping wooden cubes for new year change 2020 to 2021. New year change and starting concept.

लखनऊ : हर वर्ष की भांति वर्ष 2020 भी गुजर गया और पीछे छोड़ गया इतिहास के पन्नों के लिए एक भयानक त्रासदी, एक वायरस की कहानी और तमाम परिवारों के लिए एक दर्द भरी दास्तां ।

जिस तरह की महामारियों के बारे में हम इतिहास के पन्नों में पढ़कर जानकारी जुटाते थे, मानव की असाधारण संघर्ष करने की क्षमता का लोहा मानते थे । ऐसी ही कठिन चुनौती का सामन इस वर्ष हम सबने किया ।

कोरोनावायरस के संक्रमण ने तमाम परिवारों का पूरा परिदृश्य ही बदल दिया । कितने ही लोगों ने अपने परिजनों को खो दिया इन सब में ना जाने कितने परिवार ऐसे भी हैं जिनके पीछे रोने के लिए कोई नहीं बचा ।

वायरस की त्रासदी आर्थिक संकट और नव वर्ष का आगमन । बधाई संदेश दिए जा रहे हैं खुशियां मनाई जा रही हैं और सब कुछ बेहतर होने की आशा की जा रही है । क्या कैलेंडर बदलने से अचानक सब कुछ बदल जाएगा , सवप्न और यथार्थ की दुनिया के बीच झूल रहे लोग क्या 2020 की यादों को भुला पाएंगे ।

क्या 2020 का असर 2021 में जारी नहीं रहेगा, सब अचानक से अच्छा हो जाएगा । क्या वायरस का संक्रमण और आर्थिक संकट ठीक हो जाएगा , या फिर यह नव वर्ष 20 और 21 का महज एक आंकड़ा भर ही रहेगा ।

क्या सिर्फ आंकड़ा बदलने से सब कुछ बदल जाएगा क्या तारीख के बदलने से हमारा संकट दूर हो जाएगा जाहिर है कि सच इससे बिल्कुल उलट है । यह दौर और संघर्ष अभी जारी रहेगा । लेकिन संघर्ष और निराशा के दौर में उम्मीद और आशा की एक छोटी सी किरण भी हमें मजबूत बनाती है लड़ने की शक्ति देती है ।

उमंग हर्ष और उल्लास ना हो तो फिर जीवन कितना नीरस हो जाएगा । यह तारीखें ही तो है जो हमारे मन को बदलती हैं । सदमे और बुरे दौर में जी रहे हैं लोगों को जश्न मनाने का मौका देती हैं ।

यदि नई तारीखें ना हो तो निराशा का दौर कभी खत्म नहीं होगा । न ही त्यौहार आयेंगे ना जन्मदिन होगा ना नव वर्ष मनाया जायेगा, ना उमंग होगी ना जश्न होगा और जीवन यूं ही चलता रहेगा एकदम नीरस ।

आशा – निराशा, हार – जीत यह सब मन के ही तो अवसाद है अपनी मनोस्थिति को बदलकर हम इन स्थितियों से विजय पा सकते हैं । विपरीत धारा में भी हम अपने जीवन की नाव को पार लगा सकते हैं । मानव जाति ने इससे भी कठिन महामारियों का सामना किया है और अंत में विजय पाई है ।

जीवन के अनन्त पथ पर 2020 के इस अवरोध ने भौतिकता वाद तथा उपभोक्तावाद के समय में ईएमआई तथा बैलेंस शीट के सहारे चल रही युवा पीढ़ी को नई सीख दी है नए अनुभव दिए हैं ।

इस दौर में हमने शहर वीरान और गांव को आबाद होते हुए देखा है । सड़कों पर चल रही लाखों की भीड़ को हजारों किलोमीटर पैदल चलते हुए देखा है । जेब में पैसे होते हुए भी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करते हुए देखा है । जरूरतमंदों को सामान मुहैया कराते हुए मानव रूपी देवताओं को भी देखा है ।

इन सबके बीच हमने आपदा में अवसर तलाशते हुए मानव देहधारी शैतानों को भी देखा है । जब मानव सभ्यता जीने के लिए संघर्ष कर रही थी तब लोगों के डर के बीच इन लोगों को अपनी पूंजी और कारोबार को बढ़ाने की योजनाएं बनाते हुये और उनमें कामयाब होते हुए देखा है । जिस सरकार से जनकल्याण की उम्मीद की जाती है उसे तमाम नियमों के नाम पर जनता से अवैध वसूली करते हुए भी देखा है ।

हर आपदा अपने साथ तमाम अनुभवों को लेकर आती है । मानव संघर्ष करता है लड़ता है सीखता है और यह सिलसिला उसके जीवन भर चलता है । जीवन मरण तो प्रकृति की हाथ में है तो फिर स्थितियों से हार कैसी, निराशा कैसी और अवसाद कैसा ।

इस नव वर्ष पर सिर्फ कैलेंडर ही मत बदलिए , खुद की मन को भी बदलिए जमकर जश्न मनाइए नई सीख नई उमंग और उल्लास के साथ जीवन के संघर्ष पथ पर आगे बढ़िये ।

आप सभी को नव वर्ष की ढेरो शुभकामनाएं ।

उदय नारायण