कोरोना योद्धाओं के रूप में महिला चिकित्साकों ने संभाली कमान

  • नेशनल डॉक्टर्स डे पर विशेष
  • कोविड-19 के संकट में महिला चिकित्सक गंभीरता से निभा रही हैं अपना फर्ज

वाराणसी : डॉक्टर्स जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं। इसलिए उन्हें धरती पर भगवान का रूप कहा जाता है।

वह कई लोगों को उनकी जिंदगी वापस लौटाते हैं। डॉक्टरों के समर्पण और ईमानदारी के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए देश के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ बिधान चंद्र रॉय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए उनकी जयंती और पुण्यतिथि को हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात महिला चिकित्सक कोरोना वायरस के संकट के दौर में अपनी परवाह न करते हुये प्रतिदिन 24 घण्टे अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं।

हमने कुछ महिला चिकित्सकों से बातकर उनका अनुभव साझा करने की कोशिश की है। आइए जानते हैं उनकी भूमिका और कार्यों के बारे में।

बच्चों से दूर रहने में होती है तकलीफ, लेकिन देश की सेवा है जरूरी – डॉ सौम्या नवल

माधोपुर अर्बन पीएससी की एमओआईसी डॉ सौम्या नवल अपने क्षेत्र की कमान संभाली रही हैं। पीएससी पर 25 कर्मचारियों के स्टाफ के स्वास्थ्य का ख्याल रखने के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य परीक्षण की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

डॉ सौम्या की साढ़े तीन साल की बच्ची और डेढ़ साल के बेटे को अपनी माँ के सहारे छोड़कर शहर के हॉट स्पॉट/कंटेनमेंट पर जाकर वहाँ का सुपरवीज़न कर देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं।

स्थिति यह है कि अब उनके बच्चे उन्हें मम्मी कहने से कतराते हैं और अपनी नानी को ही माँ कहते हैं। डॉ सौम्या के पति मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में कोविड-19 के लिए सेवा प्रदान कर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

वह कहती हैं जब वह घर पहुँचती हैं तो बच्चों से दूर ही रहना पडता है। बच्चों से दूर रहने की तकलीफ़ तो होती है लेकिन एक सुकून भी है कि देश के प्रति निभा रही अपनी जिम्मेदारी से खुश हूं।

वह बताती हैं कि घर से पूरी तैयारी के साथ निकलती हैं। मास्क, कैप, दो तह के कपड़े पहनती हैं। घर आकर गैरज मे गाड़ी को धोती हैं, फिर स्वयं को सैनेटाइज कर पहले सतह के कपड़े को वहीं उतार कर रख देती हैं इसके बाद ही घर के अन्दर जाती हैं।

उन्होने बताया कि अब उनके नेतृत्व में स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस भी संचालित किया जा रहा है जिसमें अब उनके नॉन कंटेनमेंट जॉन में संचालित किया जा रहा है जिसमें गर्भवती महिलाओं एवं पाँच वर्ष तक के बच्चों, किशोर, युवतियों के स्वास्थ्य की जांच तथा टीकाकरण किया जा रहा है।

लक्ष्य दंपत्तियों को नसबंदी छोड़कर अस्थायी गर्भनिरोधक सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होने कहा की कोविड के निपटने के लिए हमने अलग से हेल्प डेस्क भी बनाया है जहां कोविड-19 से मिलते जुलते लक्षणों वाले व्यक्तियों की स्वास्थ्य की पूरी सावधानी बरतते हुये प्रारम्भिक जांच अलग से की जाती है और आवश्यकतानुसार उन्हें अग्रिम स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की जा रही है।

डॉ सौम्या कहती हैं कि बच्चों एवं महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ कोविड 19 के अंतर्गत निर्देशित कार्य करना एक चुनौती है परंतु आज देश को हमारी जरूरत है और हम देश के साथ है।

जब परिवार हो साथ तो कोरोना से डरने की क्या बात – डॉ ममता पांडे

मँड़ुआडीहा अर्बन पीएचसी पर तैनात एमओआईसी डॉ ममता पाण्डेय, 37 लोगों के स्टाफ के साथ लॉकडाउन के पहले दिन से पूरी तैयारी के साथ क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं।

डॉ ममता बताती हैं उनकी 10 वर्ष बेटी और 12 वर्ष का बेटा तथा 75 वर्षीय माँ भी साथ रहती हैं। सबकी देखभाल करना उनकी ही ज़िम्मेदारी है। पति भी डॉक्टर हैं। खुद ही घर का सारा काम भी करती हैं।

जब वह घर से पीएचसी के लिए जाती हैं तो घर वालों को हमेशा डर लगा रहता है। शहर के हॉट स्पॉट/कंटेनमेंट पर जाकर वहाँ का सुपरवीज़न का कार्य कर रही हैं।

डॉ ममता बताती हैं कि मेरे बच्चे कहते हैं ठीक से रहना, अपना ध्यान रखना, बच्चों की बातें सुनकर अच्छा लगता है कि वह अकेली नहीं हैं उनका परिवार भी इस परिस्थिति में साथ हैं।

वह बताती हैं कि सर्वे के दौरान वह बाहर का पानी तक नहीं पीती हैं। घर पर आकर ही गुनगुना पानी पीती हैं। पूरे दिन के पानी की कमी को पूरा करती हैं। ब्लीचिंग पाउडर से सभी कपड़ों को अच्छे से धोती हैं।

सर्वे के दौरान यह सोचकर चलती हैं कि हमारी वजह से लोग संक्रमित न हो इसलिए दिन में दो से तीन बार पीएचसी को सेनाटाइज कर देते है। वहीं अब बुधवार व शनिवार को टीकाकरण सत्र भी शुरू किया जा चुका है जिसमें विशेष सावधानी बरती जा रही हैं।

पहले लॉकडाउन में बहुत कम पॉज़िटिव मरीज थे, लेकिन मई और जून महीने में पोजिटिव मरीजों की संख्या ज्यादा हो गई हैं। डॉ ममता बताती हैं कि वर्तमान में ज्यादा सतर्क रहने कि आवश्यकता है।

पीएचसी पर आ रहे लोगों को समझा रहे हैं कि दो गज की दूरी, हाथों को धोना एवं सेनेटाईज़ करना तथा मुंह को मास्क, रुमाल, दुपट्टा या गमछा से ढककर रखना, कहीं आए जाएं। बहुत ही ज्यादा जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें। उनका कहना है कि जब हम सब आपके स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए बाहर हैं, तो आप घरों में रहकर हमारा साथ दें।

परिवार की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है जितनी कोरोना से जंग जीतना – डॉ अनीला सिंह

शिवपुर अर्बन पीएचसी की एमओआईसी पद पर तैनात डॉ अनीला सिंह अपने कर्तव्य का पालन एक धर्म की तरह निभा रही हैं। वह कहती हैं कि प्रत्येक देशवासी अपने ओर से कोरोना वायरस संक्रमण के समय देश के साथ है।

हम तो बस जनता के प्रति अपना धर्म निभा रहे हैं। महामारी के दौर में हम डॉक्टर का यह फर्ज है कि हम देश की जनता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। डॉ अनीला बताती हैं कि उनका बड़ा और संयुक्त परिवार है तो देखभाल भी उतनी ही जरूरी है।

पति डॉक्टर है। 11 वर्ष की बेटी, 9 वर्ष का बेटा और 75 वर्षीय ससुर और 71 वर्षीय सास के साथ ही देवर-देवरानी और उनके दो बच्चों मिलकर सभी एक साथ रहते हैं। डॉ अनीला बताती हैं कि शिवपुर पीएचसी पर 13 स्टाफ और 10 आशा कार्यकर्ता हैं।

वह शहर के हॉट स्पॉट/कंटेनमेंट पर जाकर वहाँ का सुपरवीज़न का कार्य कर रही हैं। क्षेत्र सर्वे के दौरान सभी घरों से बहुत सहयोग मिला रहा है। सर्वे के बाद बाहर से घर आती हैं तो सबसे दूरी बनाकर रखनी पड़ती है। क्षेत्र सर्वे के समय वह कुछ भी खाने पीने से बचती हैं।

घर आकार ही खानपान होता है। फ्रिज में रखी या ठंडी चीजें बिल्कुल नहीं खाती, घर में साफ-सफाई हमेशा रखती हैं। डॉ अनिला बताती हैं कि पीएचसी पहले भी नियमित रूप से सैनेटाइज होती थी वहीं अब दिन में तीन से चार बार सैनेटाइज करा रही हैं।

साथ ही स्टाफ को भी बार-बार हाथ धोने को कहती हैं। शिवपूर क्षेत्र में कोरोना पोजिटिव व्यक्तियों के मिलने से क्षेत्रवासियों को हिम्मत देते हुये उनका सहयोग भी देना पड़ता है।

यद्यपि कुछ लोग परिस्थिति वश सहायक कर्मचारियों से गुस्से से बात करते हैं लेकिन उन्हें समझाया जाता है कि इस बीमारी में हिम्मन से काम लेना है और हम आपके साथ हैं। यह बीमारी किसी को कभी भी हो सकती है।

इससे डरने की जरूरत नहीं है सिर्फ बीमारी से लड़ने की हिम्मत होनी चाहिए। डॉ अनीला कहती हैं कि हम डॉक्टर का कार्य सिर्फ जाँच, परीक्षण और दवा देना ही नहीं बल्कि लोगों को मानसिक तौर पर मजबूत भी करना है।

वह कहती हैं कि सभी डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ और फ्रंट लाइन वर्कर एक मिशन मोड के रूप में कार्य रहे हैं जिससे हम सभी मिलकर बनारस के साथ ही साथ देश को कोरोना से मुक्त कर सकें।