कोविड-19 के दौरान संचार में चुनौतियाँ एवं उनके निराकरण विषय पर हुआ कार्यशाला का आयोजन

मुख्य बातें

  • ब्लॉक स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारियों/बीपीएम/बीसीपीएम को प्रशिक्षित करने के लिए जूम एप के जरिए दिया गया प्रशिक्षण
  • कोविड पर सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने से ही मिलेगी कोरोना पर जीत – डॉ. हीरालाल

बाँदा : कोविड–19 के दौर में ‘संचार में चुनौतियाँ एवं उसके निराकरण विषय’ पर शुक्रवार को एक वर्चुअल कार्यशाला आयोजित की गयी.

जिसमें जिले के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया मेनेजर (बीसीपीएम), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधकों (बीपीएम) को कोविड महामारी के दौरान संचार को सुदृढ़ करने, प्रवासियों के प्रबंधन और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रभावी संचालन से सम्बंधित जानकारी और ज़रूरी टिप्स दिए गये।

कार्यशाला को सम्बोंधित करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मिशन निदेशक व जनपद के पूर्व जिलाधिकारी डॉ. हीरालाल ने कहा कि कोरोना महामारी पूरे विश्व के लिए एक नई चुनौती है.

लेकिन पिछले दो महीनों में हमें इसके बारे में काफी जानकरी और जागरुकता हासिल हुई है। इस बीमारी की कोई दवाई न होने के कारण इससे बचाव ही एक मात्र उपाय है।

इसलिए हमें कोरोना से सम्बंधित सरकारी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। और अधिक से अधिक लोगों को इसके बारे में जागरुक करना चाहिए। तभी इस बीमारी पर जीत हासिल होगी।

उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपीटीएसयू), यूनीसेफ और सेंटर फॉर एडवोकेसी एण्ड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जूम एप के जरिए जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी व सभी ब्लॉकों के बीसीपीएम व बीपीएम ने प्रतिभाग किया।

कार्यशाला में प्रशिक्षणकर्ता डॉ. निर्मल सिंह ने बाहर से आने वाले प्रवासियों के प्रबंधन के विषय में चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाहर से आए लोगों की परेशानियों पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

अगर कोई व्यक्ति होम क्वारंटाइन छोड़कर कहीं बाहर निकलता है तो उसको समझाएं। नहीं समझता है तो अन्य जरुरी कार्यवाही करें। इसमें निगरानी समिति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।

संचार की महत्वता को समझाते हुये यूनिसेफ़ से संगीता आनंद ने बताया कि इस समय ऐसे संदेशों को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करना चाहिए जो देश हित में हो।

मीडिया में छा रहे कोरोना योद्धा के बारें में बताते हुये उन्होने कहा कि आज के समय में वह हर एक व्यक्ति कोरोना योद्धा है जो कोविड-19 से बचाव के तरीकों को गंभीरता से निभाता है, हम ऐसे हर एक व्यक्ति पर स्टोरी कर सकते है।

यूपीटीएसयू से डॉ. शालिनी रमन ने दुबारा शुरू हुई आरएमएनसीएच की सेवाओं को चालू करने में क्या सावधानियाँ रखे इस पर चर्चा की।

सीफॉर की नेशनल प्रोग्राम लीड रंजना द्विवेदी ने बताया कोविड-19 के दौरान कैसे संवेदनशील भाषा और व्यवहार पर ध्यान दे और किन मुद्दों को मीडिया साझा करे इस पर बात के साथ ही पिछले 6 माह के मीडिया ट्रेंड के बारें में बताया।

क्या कहते हैं कार्यशाला के प्रतिभागी

कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी सुधीर गुप्ता ने बताया कि कार्यशाला में विशेषज्ञों के द्वारा जो जानकारियां दी गई हैं वह काफी महत्वपूर्ण हैं।

इससे जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के क्षमता निर्माण में मदद मिलेगी और महामारी का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।