March 24, 2020

विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च)

मुख्य बातें

  • अब डाकिए पहुंचाएंगे टीबी मरीजों के सैंपल
  • अब एमडीआर रोगियों को नहीं लेने होगे इंजेक्शन
  • डाक विभाग को भेजे गए क्षय रोग अधिकारियों के नंबर
  • राज्य क्षय रोग और डाक विभाग में करार

ललितपुर : देश से वर्ष 2025 तक क्षय रोग (टीबी) के पूरी तरह से खात्मे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को तय समय सीमा से पहले पूरा करने के लिए प्रदेश में चलाये जा रहे कार्यक्रमों और योजनाओं को धार देने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।

इसी क्रम में टीबी मरीजों के सैंपल की जल्द से जल्द बेहतर जांच कराने के लिए राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग ने मंगलवार को विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च) पर करार किया।

इसके तहत अब टीबी मरीजों का सैंपल लैब तक पहुंचाने का काम डाकिये करेंगे। इससे पहले यह सैंपल कोरियर से भेजे जाते थे, जिससे उसमें अधिक समय लगता था।

जिला क्षय रोग अधिकारी डा. जे एस बक्शी का कहना है कि टीबी मरीजों के मामले में सबसे बड़ी चुनौती जल्दी से जल्दी जांच कराने की होती है क्योंकि एक टीबी मरीज अनजाने में न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है।

इसी को देखते हुए डाक विभाग से करार किया गया है कि टीबी जांच केन्द्रों से 24 घंटे के अन्दर सीबीनाट मशीन सेंटर तक सैम्पल पहुंचाने का काम करेगा।

इसके साथ ही सीबीनाट मशीन सेंटर से प्रदेश के छह जिलों (लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मेरठ व वाराणसी) में स्थित ड्रग कल्चर टेस्ट सेंटर तक 48 घंटे के अन्दर सैपल पहुंचाने का काम करेगा।

इससे जहां समय की बचत होगी वहीं अनजाने में किसी को टीबी जैसी बीमारी की जद में आने से बचाया भी जा सकेगा। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों की सूची डाक विभाग को उपलब्ध करा दी गई है।

इसके अलावा पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार व श्रम विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है।

डॉ बक्शी ने बताया आज से जिले में आल ओरल ड्रग रेजीम की शुरुआत भी करी गई है| यह दवाई एमडीआर टीबी मरीजों के लिए होती है| यह टीबी बहुत खतरनाक होती है इसमें फर्स्ट लाइन ड्रग काम नही करते हैं इसलिए उन्हें सेकंड लाइन ड्रग शुरू करना पड़ता है|

अगर आसान शब्दों में कहें तो इस तरह की टीबी में कुछ दवाएं काम नहीं करती हैं| इस रोग का ठीक होने का दर 50% है| एमडीआर रोगी से अगर किसी दूसरे को टीबी होगी तो वह एमडीआर टीबी ही होगी|

इस रोग का इलाज 18 से 20 महीना तक चलता है| पहले एमडीआर मरीज़ को लगातार 4 महीने तक इंजेक्शन लेने होते थे लेकिन अब सभी एमडीआर मरीज़ को सिर्फ खाने वाली दवाई (आल ओरल ड्रग रेजीम) ही दी जाएगी| इसके तहत आज से जिले में दो एमडीआर मरीजों का उपचार शुरू हुआ है|

टीबी उन्मूलन कार्यक्रम जिला समन्वयक शिव राम निरंजन ने बताया कि एक्टिव केस फाइंडिंग(एसीएफ) अभियान के अंतर्गत 2018 -2020 तक 535 टीबी रोगी मिले हैं|

टीबी मरीजों के बेहतर खानपान के लिए इलाज के दौरान प्रतिमाह 500 रूपये दिए जाने की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत 5,404,500 रुपयों का भुगतान किया गया है और इससे 2425 मरीज़ लाभान्वित हुए हैं|